Vehicle Insurance Policy: अगर आपके पास कार या बाइक है तो उसका इंश्योरेंस वैध होना बेहद जरुरी है. वरना आने वाले समय में शायद आपको पेट्रोल पंप पर फ्यूल न मिले. अब वाहन की बीमा पॉलिसी की स्थिति जानने के लिए सिर्फ ट्रैफिक पुलिस की जांच पर निर्भर रहने की जरुरत नहीं है. डिजिटल वाहन रिकॉड के जरिए आसानी से पता लगाया जा सकता है कि आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस एक्टिव है या उसकी अवधि खत्म हो चुकी है.

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गाड़ी के नंबर से मिलेगी जानकारी

वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से उनकी बीमा स्थिति का पता लगाया जा सकता है. यह नंबर सरकारी वाहन डेटाबेस से जुड़ा रहता है, जिसमें गाड़ी की जरुरी जानकारी के साथ इंश्योरेंस से संबंधित डिटेल्स भी उपलब्ध रहती हैं.

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पेट्रोल पंप पर कैसे होगी पहचान?

पेट्रोल पंप पर रजिस्ट्रेशन नंबर से गाड़ी का इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा और तुरंत पता चलेगा कि पॉलिसी एक्टिव है या एक्सपायर हो गई है. रिपोर्ट हैं कि अब पेट्रोल पंप पर नंबर प्लेट डिटेक्ट करने वाले कैमरे लगेंगे जो सॉफ्टवेयर की मदद से पंप अटेंडेंट को यह बताएंगे कि गाड़ी का इंश्योरेंस है या नहीं, या कहीं एक्सपायर तो नहीं हो गया.

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नंबर प्लेट बनेगी पहचान का आधार

नंबर प्लेट पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर से वाहन की डिजिटल जानकारी हासिल की जा सकती है. ऐसे में इंश्योरेंस की स्थिति जांचने के लिए हर बार पॉलिसी के कागजात दिखाना जरुरी नहीं होगा.

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्यों जरूरी है?

भारत में सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाने के लिए कम से कम थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस होना जरूरी है. यह दुर्घटना की स्थिति में तीसरे पक्ष को हुए नुकसान के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि जिन गाड़ियों का बीमा नहीं है, उनको फ्यूल न दिया जाए.

इंश्योरेंस खत्म होने पर क्या होगा?

अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस एक्सपायर हो गया है तो वाहन चलाना परेशानी का कारण बन सकता है. बिना वैध इंश्योरेंस वाहन चलाने पर मोटर व्हीकल नियमों के तहत कार्रवाई और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

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