गांव में कैसे शुरू कर सकते हैं कोल्हू का बिजनेस, इसमें कितना आता है खर्चा?
कोल्हू एक पारंपरिक तरीका है, जिसमें सरसों, बादाम, मूंगफली, कुसुम तिल से तेल निकाला जाता है. इसमें तेल बूंद-बूंद करके रूम टेंपरेचर पर निकाला जाता है, जिससे बीजों के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं.

ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक तरीकों से जुड़े बिजनेस एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. इन्हीं बिजनेस में कोल्हू से तेल निकालने का बिजनेस भी शामिल हैं. कोल्हू से बने तेल की शुद्धता, सेहत और भरोसे की वजह से इस तेल की मांग शहरों से लेकर विदेश तक बढ़ रही है. खास बात यह है कि यह बिजनेस गांव में रहकर भी शुरू किया जा सकता है और इसमें तकनीकी के साथ-साथ पारंपरिक पद्धति का अच्छा मेल देखने को मिलता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गांव में कोल्हू का बिजनेस कैसे शुरू कर सकते हैं और इसमें कितना खर्च आता है.
क्या है कोल्हू का बिजनेस?
कोल्हू एक पारंपरिक तरीका है, जिसमें सरसों, बादाम, मूंगफली, अलसी, कुसुम तिल जैसे बीजों से तेल निकाला जाता है. इसमें तेल बूंद-बूंद करके रूम टेंपरेचर पर निकाला जाता है, जिससे बीजों के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं. यही वजह है कि कोल्हू से निकला तेल मशीन से बने तेल की तुलना में ज्यादा शुद्ध और महंगा माना जाता है. वहीं एक कोल्हू से दिन में औसतन 5 से 7 लीटर तेल निकाला जा सकता है. अगर एक से ज्यादा कोल्हू लगाए जाते हैं, तो उत्पादन उसी हिसाब से बढ़ जाता है. वहीं महीने में 700 से 1000 लीटर तक तेल निकालना संभव है. इसके अलावा बीज की क्वालिटी और मेहनत पर उत्पादन निर्भर करता है.
बिजनेस को शुरू करने में कितना आता है शुरुआती खर्च?
कोल्हू का बिजनेस छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है. एक कोल्हू लगाने में करीब 60 हजार से 1 लाख रुपये तक का खर्च आता है. बीज खरीदने के लिए इसमें अलग से पूंजी चाहिए. इसके अलावा तेल की पैकिंग के लिए टीन या कांच की बोतलों का खर्च जुड़ता है. वहीं अगर बैलों से कोल्हू चलाया जाए तो उनके चारे और देखभाल की व्यवस्था भी करनी होती है. कुल मिलाकर यह बिजनेस सीमित निवेश में शुरू हो सकता है और धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है.
कोल्हू के बिजनेस में कमाई और मुनाफा
कोल्हू से निकले तेल की कीमत बाजार में ज्यादा होती है. सरसों का तेल करें 500 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है. वहीं बादाम जैसे तेलों की कीमत 3000 रुपये प्रति लीटर तक जाती है. तेल निकालने के बाद जो खल बचती है, वह भी पशु आहार के रूप में बिक जाती है. जिससे एक्स्ट्रा आमदनी होती है. इसके अलावा खर्च निकालने के बाद महीने में इससे अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है.
गांव के लिए यह बिजनेस क्यों फायदेमंद
कोल्हू का बिजनेस गांव में रोजगार का साधन बन सकता है. इसमें स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल होता है और ज्यादा मशीनों पर निर्भरता नहीं रहती है. साथ ही यह बिजनेस पारंपरिक ज्ञान को जिंदा रखता है और सेहत को लेकर जागरूक ग्राहकों की जरूरत भी पूरी करता है. इसलिए इस बिजनेस को गांव के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
ये भी पढ़ें-घर बनाने के लिए कैसे निकाल सकते हैं PF का पैसा, कितनी रकम हो सकती है विड्रॉल
Source: IOCL



























