देशभर में गर्मी बढ़ने लगी है. वहीं मौसम बदलने के साथ ही एयर कंडीशनर की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है. खासकर उत्तर भारत में धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों को परेशान कर दिया है. ऐसे में ज्यादातर घरों में एसी का इस्तेमाल भी बढ़ गया है, लेकिन इसके साथ ही बिजली बिल को लेकर भी मिडिल क्लास परिवारों में चिंता बढ़ जाती है. इसी परेशानी के बीच अब सोलर एसी भी एक नए ऑप्शन के तौर पर चर्चाओं में आ रहा है. अब मिडिल क्लास लोग एयर कंडीशनर से अलग सोलर एसी की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सोलर एसी कितने में आता है और यह नॉर्मल एसी से महंगा होता है या फिर सस्ता.

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सोलर एसी क्या होता है और कैसे काम करता है?

सोलर एसी सूरज की रोशनी से बनने वाली ऊर्जा पर चलता है. यह हाइब्रिड तकनीक पर आधारित होता है यानी दिन में सोलर पैनल से और जरूरत पड़ने पर रात में बिजली या बैटरी बैकअप से भी चल सकता है. इससे बिजली पर निर्भरता कम हो जाती है और बिल से राहत मिलती है.

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नॉर्मल एसी से कितना महंगा होता है सोलर एसी?

अगर सोलर एसी की कीमत की बात करें तो सोलर एक नॉर्मल एसी के मुकाबले महंगा होता है. दरअसल एक नॉर्मल एसी की कीमत करीब 30,000 से 45,000 के बीच होती है. वहीं सोलर एसी की कीमत 85,000 से 1.30 लाख रुपये तक जा सकती है. इसके अलावा अगर पूरा सोलर सेटअप लगवाते हैं तो इसकी लागत करिए डेढ़ लाख तक भी जा सकती है. ऐसे में अगर आप 1 टन का सोलर एसी लगवाना चाहते हैं तो उसे ठीक से चलाने के लिए करीब 1.5 किलोवाट के सोलर पैनल की जरूरत होती है. वहीं तेज धूप में यह सिस्टम सीधे सोलर एनर्जी पर चलता है और बेहतर कूलिंग देता है.

सोलर एसी से होती है बिजली बिल में बचत

नॉर्मल एसी को अगर रोज 8 से 10 घंटे चलाया जाए तो महीने का बिजली बिल सिर्फ एसी से ही 2000 से 3000 रुपये तक आ सकता है. वहीं सोलर एसी भले ही शुरुआत में आपको महंगा लगाता हो, लेकिन इस्तेमाल करने पर यह खर्च काफी कम होकर 200 से 500 या कुछ मामलों में लगभग जीरो तक हो सकता है. यानी सोलर एसी  से सालभर में 20,000 से 30,000 की बचत संभव है. दरअसल सोलर एसी को एक तरह का वन टाइम निवेश माना जाता है. वहीं 2 से 3 साल में बिजली बिल की बचत से इसकी लागत निकल सकती है. इसके बाद कूलिंग लगभग मुफ्त हो जाती है. साथ ही एनवायरनमेंट के लिए भी यह बेहतर माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है.

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