सोचिए, अगर हर महीने आपकी जेब से सिर्फ 5,000 रुपये अलग निकलें और कुछ समय बाद वही पैसे बढ़कर 1 लाख रुपये के फंड में बदल जाए, तो कैसा लगेगा दरअसल, बड़ी रकम से ही इन्वेस्टमेंट शुरू करना जरूरी नहीं है. छोटी बचत को हर महीने पर इन्वेस्टमेंट करने की आदत भी धीरे धीरे बड़ा फंड तैयार कर सकती है. अब सवाल ये है कि 5,000 रुपये महीने की बचत से 1 लाख रुपये तक पहुंचने में आखिर कितने महीने लग सकते हैं और इसके लिए एसआईपी बेहतर है या पोस्ट ऑफिस की आरडी.

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म्यूचुअल फंड की एसआईपी उन लोगों के लिए एक तरीका है, जो हर महीने में थोड़े थोड़े पैसे इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं. अगर आप हर महीने 5,000 रुपये की एसआईपी करते हैं, तो 18 महीने में आपकी जेब से कुल 90,000 रुपये जाएंगे.

अगर साल का 12% रिटर्न मानकर चलें, तो करीब 18 महीने में ये पैसे लगभग 98,000 रुपये हो सकती है. ऐसे में 1 लाख रुपये का आंकड़ा करीब 19 महीने के आसपास पार हो सकता है. 1.7 साल में 95,000 रुपये के इन्वेस्टमेंट पर करीब 9,054 रुपये का अनुमान के हिसाब से रिटर्न मिल सकता है और कुल रकम लगभग 1.04 लाख रुपये हो सकती है.

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500 रुपये ज्यादा लगाने से फायदा

अगर आप टारगेट थोड़ा जल्दी हासिल करना चाहते हैं, तो जोखिम बढ़ाने के बजाय हर महीने इन्वेस्टमेंट की रकम बढ़ाना एक आसान तरीका हो सकता है. जैसे 5,000 की जगह 5,500 रुपये महीने इन्वेस्टमेंट करने से 1 लाख के टारगेट तक पहुंचने में मदद मिल सकती है.

ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड एसआईपी बाजार से जुड़ी होती है. इसलिए 12% रिटर्न सिर्फ एक अनुमान है, इसकी गारंटी नहीं है.

बाजार का जोखिम नहीं चाहिए तो RD

अगर आप बाजार के उतार चढ़ाव से पैसा दूर रखना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की आरडी पर भी विचार किया जा सकता है. इसमें हर महीने फिक्स रकम जमा करनी होती है और योजना के अनुसार लागू ब्याज दर के हिसाब से रकम बढ़ती है.

6.45% साल का ब्याज दर मानने पर 5,000 रुपये  महीने के जमा से करीब 21 महीने में 1 लाख रुपये के टारगेट तक पहुंचा जा सकता है. मैच्योरिटी पर रकम 1,11,406 रुपये और कुल ब्याज 6,406 रुपये हो सकता है.

आरडी में रिटर्न ज्यादा अनुमानित रहता है, जबकि एसआईपी में रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर डिपेंड करता है. इसलिए एसआईपी में ज्यादा कमाई की संभावना के साथ जोखिम भी रहता है.

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