होली पर ठंडाई बनाने के लिए कितनी भांग ला सकते हैं घर, क्या है इसको लेकर नियम?
भांग आमतौर पर पत्तियों और बीजों से बनती है और इसे लेकर नियम राज्य सरकारें तय करती है, बिना लाइसेंस बेचना या जरूरत से ज्यादा मात्रा रखना परेशानी खड़ी कर सकता है.

होली का नाम आते ही रंग, गुलाल, हंसी-मजाक, गुजिया और ठंडाई की याद आ जाती है. कई जगहों पर ठंडाई में भांग मिलाकर पीने की परंपरा भी है. खासकर उत्तर भारत में होली और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों पर भांग का यूज आम माना जाता है.लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होली पर ठंडाई बनाने के लिए कितनी भांग घर ला सकते हैं, क्या इसके लिए कोई कानूनी सीमा है और इसको लेकर नियम क्या है. इन सवालों का जवाब जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि नशे से जुड़ी चीजों पर कानून काफी सख्त है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि होली पर ठंडाई बनाने के लिए कितनी भांग घर ला सकते हैं और इसको लेकर नियम क्या है .
होली पर ठंडाई के लिए कितनी भांग ला सकते हैं?
होली पर ठंडाई बनाने के लिए भांग लाने को लेकर कोई अलग छूट कानून में तय नहीं है. भारत में नशीले पदार्थों पर मुख्य कानून Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 लागू होता है, जिसके तहत गांजा (फूल वाला हिस्सा) और चरस अवैध है, लेकिन भांग आमतौर पर पत्तियों और बीजों से बनती है और इसे लेकर नियम राज्य सरकारें तय करती है. कई राज्यों में लाइसेंस प्राप्त सरकारी दुकानों से सीमित मात्रा में भांग खरीदने की अनुमति होती है, लेकिन बिना लाइसेंस बेचना या जरूरत से ज्यादा मात्रा रखना परेशानी खड़ी कर सकता है. इसलिए होली के लिए सिर्फ अधिकृत दुकान से घरेलू यूज भर की कम मात्रा ही लें और अपने राज्य के स्थानीय नियम जरूर जान लें, क्योंकि इसे लेकर कानून सख्त है और अधिक मात्रा रखने पर कार्रवाई हो सकती है.
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इसको लेकर नियम क्या है
भारत में भांग, गांजा और चरस से जुड़े नियम Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) के तहत तय होते हैं. इस कानून के अनुसार गांजा (फूल वाला हिस्सा) और चरस (राल) रखना, बेचना, खरीदना या ले जाना अवैध है और यह दंडनीय अपराध है, जिसकी सजा मात्रा पर निर्भर करती है.छोटी मात्रा पर जेल या जुर्माना, जबकि ज्यादा या व्यावसायिक मात्रा पर 10 से 20 साल तक की सजा हो सकती है. वहीं भांग (पत्तियां और बीज) को लेकर सीधे राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि इसके नियम राज्य सरकारें तय करती हैं. कई राज्यों में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त सरकारी दुकानों से ही भांग खरीदी जा सकती है और बिना लाइसेंस बड़ी मात्रा में रखना या बेचना गैरकानूनी हो सकता है.
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Source: IOCL

























