1.5 लाख रुपये के पार पहुंचा 10 ग्राम सोना, क्या इस वक्त गोल्ड खरीदना सही फैसला होगा?
Gold Investment: सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं और निवेशकों में हलचल तेज है. क्या यह खरीदारी का सही मौका है या इंतजार बेहतर रहेगा? जान लीजिए जवाब.

Gold Investment: भारत में सोने की कीमतें इस समय इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं. 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए 1.5 लाख रुपये के पार निकल चुका है. यह आंकड़ा सिर्फ निवेशकों को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी चौंका रहा है. अगर पीछे मुड़कर देखें तो साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4400 रुपये का था.
2010 में यह बढ़कर 20728 रुपये हुआ. 2020 में कीमत 50151 रुपये पहुंची और अब महज पांच साल में यह तीन गुना से ज्यादा हो चुकी है. इतनी तेज रफ्तार ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जब सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर है तो क्या अभी इसे खरीदना समझदारी होगी या इंतजार बेहतर रहेगा? चलिए आपको बताते हैं जवाब.
क्यों बढ़ रही सोने की कीमतें?
सोने की कीमतों में जो रिकॉर्ड उछाल देखने को मिल रहा है, उसके पीछे सबसे बड़ा फैक्टर है ग्लोबल अनिश्चितता. दुनिया के कई हिस्सों में जियो-पॉलिटिकल टेंशन, युद्ध की आशंका, स्लो होती इकॉनमी और ब्याज दरों को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है. ऐसे माहौल में निवेशक रिस्क लेने से बचते हैं और पैसा सेफ ऑप्शन्स में शिफ्ट करते हैं. गोल्ड हमेशा से अल्टीमेट सेफ हेवन माना गया है. यही वजह है कि जैसे ही स्टॉक मार्केट वोलाटाइल होता है. सोने की डिमांड तेजी से बढ़ती है और दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंचने लगते हैं.
दूसरी बड़ी वजह है डीडॉलराइजेशन ट्रेंड. कई देश अब अपने फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं और गोल्ड होल्डिंग लगातार बढ़ा रहे हैं. सेंट्रल बैंक एग्रेसिव तरीके से सोना खरीद रहे हैं. जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बन रहा है. ऊपर से डॉलर की कमजोरी और इंटरनेशनल ट्रेड पैटर्न में बदलाव ने गोल्ड को और स्ट्रॉन्ग बना दिया है. यही कारण है कि आज सोना सिर्फ ज्वेलरी नहीं बल्कि ग्लोबल फाइनेंशियल सेफ्टी नेट बन चुका है.
क्या इस वक्त सोना खरीदना सही है?
मौजूदा ग्लोबल हालात को देखें तो यह साफ है कि अनिश्चितता अभी जल्दी खत्म होती नहीं दिख रही. इसका सीधा मतलब है कि शॉर्ट टर्म में गोल्ड प्राइस ऊंचे लेवल पर बने रह सकते हैं. लेकिन रिकॉर्ड हाई पर खड़े किसी भी एसेट में एंट्री लेना हमेशा रिस्की होता है. यहां एक साथ बड़ा पैसा डालना समझदारी नहीं क्योंकि मामूली नेगेटिव खबर भी तेज करेक्शन ला सकती है.अगर आप गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, तो बेस्ट स्ट्रैटेजी होगी ग्रेजुअल इन्वेस्टमेंट.
यानी छोटे-छोटे हिस्सों में खरीदारी करें. डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या गोल्ड फंड में SIP जैसे ऑप्शन आपको प्राइस वोलाटिलिटी से बचाने में मदद कर सकते हैं. इससे एवरेजिंग का फायदा मिलेगा और गिरावट का झटका कम लगेगा. याद रखें, मौजूदा तेजी के पीछे असली वजह डर और ग्लोबल टेंशन है. इसलिए फैसला इमोशन से नहीं, क्लियर प्लान के साथ लें.
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