Gold Loan Risks: जब पैसों की अचानक जरूरत पड़ती है, तो गोल्ड लोन एक आसान और जल्दी मिलने वाला ऑप्शन माना जाता है. जहां कुछ ही समय में कैश आपके हाथों में होता है. इसी वजह से कई लोग इसे सुरक्षित मानते हैं. खासकर इसकी आसान प्रक्रिया लोगों को और अधिक आकर्षित करती है.  

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हालांकि आसान प्रोसेस और दिखने में कम ब्याज दरों के बावजूद इसमें कुछ जोखिम भी होते हैं. जिन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है. आइए जानते हैं, गोल्ड लोन में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

भुगतान में चूक पर नीलामी का जोखिम

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गोल्ड लोन में भुगतान के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं. कहीं सिर्फ ब्याज चुकाना होता है और अंत में पूरी रकम देनी होती है. कई मामलों में पूरा पैसा एक साथ लौटाना पड़ता है. ऐसे में कई बार लोग आखिरी समय पर बड़ी रकम का इंतजाम नहीं कर पाते, जिससे जोखिम बढ़ जाता है.

अगर तय समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो लेंडर को गिरवी रखे सोने की नीलामी करने का अधिकार होता है. नीलामी के बाद बचे हुए पैसे आपको मिल सकते हैं. लेकिन सोने के साथ जुड़ा आपका रिश्ता हमेशा के लिए खो जाता है. इसलिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है. 

दिखने वाली दर और असली खर्च में फर्क

गोल्ड लोन की ब्याज दरें पहली नजर में कम लगती हैं. लेकिन जो दरें सामने दिखाई जाती हैं, वही पूरी लागत नहीं होती. कई बार इसके साथ प्रोसेसिंग फीस, गोल्ड की वैल्यूएशन फीस और दूसरे चार्ज भी जोड़ दिए जाते हैं.

कुछ मामलों में कंपाउंडिंग भी लगाया जाता है. जिससे समय के साथ लोन की कुल राशि काफी ज्यादा हो सकती है. ऐसे में शुरुआत में सस्ता लगने वाला लोन अंत तक महंगा साबित हो सकता है.

कीमत गिरने पर बढ़ सकता है खतरा

गोल्ड लोन में आरबीआई के नियम के अनुसार सिर्फ 75 प्रतिशत तक ही लोन मिलता है. अगर बीच में सोने की कीमत गिरती है, तो बैंक आपसे अतिरिक्त सोना या पैसा मांग सकता है. अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो गिरवी रखे सोना पर जोखिम आ सकता है.

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