Flight Ticket Insurance: देश में रोजाना लाखों लोग फ्लाइट से ट्रैवल करते हैं. कोई काम के लिए उड़ता है. कोई छुट्टियों के लिए, तो कोई विदेश जाने के लिए इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़ता है. हवाई सफर तेज जरूर होता है. लेकिन उसमें रिस्क बना रहता है. कभी टेक्निकल फॉल्ट, कभी खराब मौसम, तो कभी ह्यूमन एरर चूक की वजह से हादसे हो जाते हैं. 

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12 जून 2025 को हुआ भयानक हादसा जिसमें 241 लोगों की जान चली गई थी. आज भी लोगों को झकझोर देता है. ऐसे हादसों के बाद एक सवाल हर किसी के मन में उठता है. क्या फ्लाइट टिकट बुक करते वक्त यात्रियों को कोई बीमा अपने आप मिलता है. और अगर हादसा हो जाए तो मुआवजे का नियम क्या कहता है. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

क्या है फ्लाइट एक्सीडेंट इंश्योरेंस?

फ्लाइट एक्सीडेंट इंश्योरेंस दरअसल हवाई सफर के दौरान होने वाले हादसों के लिए एक सेफ्टी कवर होता है. अगर उड़ान के वक्त कोई दुर्घटना हो जाती है, तो यह यात्री या उसके परिवार को आर्थिक मदद देता है. इसमें मौत, स्थायी दिव्यांगता और गंभीर चोट जैसी स्थितियां शामिल होती हैं. बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि ज्यादातर एयरलाइंस यात्रियों के लिए एक बेसिक इंश्योरेंस पहले से लेती हैं. जो टिकट के साथ ही जुड़ा होता है. 

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इसके अलावा कई एयरलाइंस और ट्रैवल वेबसाइट्स टिकट बुक करते समय अलग से पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस का ऑप्शन भी देती हैं. जिसे यात्री अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकता है. इसमें कम प्रीमियम देकर ज्यादा कवरेज लिया जा सकता है. अगर कभी हादसा होता है तो क्लेम की प्रोसेस आम तौर पर परिवार या नॉमिनी शुरू करता है. जिसमें डेथ सर्टिफिकेट, टिकट की जानकारी और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं.

अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में मुआवजे का नियम क्या?

अगर किसी इंटरनेशनल फ्लाइट में हादसा होता है. तो मुआवजा Montreal Convention 1999 के तहत किया जाता है. भारत इस अंतरराष्ट्रीय संधि का हिस्सा है. इसलिए यहां से उड़ने या यहां आने वाली इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर यही नियम लागू होते हैं. इस कन्वेंशन के तहत हर यात्री के लिए करीब 128821  स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR तक का मुआवजा तय है. 

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भारतीय करेंसी में यह रकम लगभग 1.4 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है. हालांकि असल रकम SDR की वैल्यू और उस समय के करेंसी रेट पर निर्भर करती है. खास बात यह है कि शुरुआती लिमिट तक मुआवजे के लिए एयरलाइंस को अपनी गलती साबित होना जरूरी नहीं. लेकिन अगर यह साबित हो जाए कि हादसा एयरलाइंस की लापरवाही से हुआ तो तय लिमिट से ज्यादा मुआवजा भी मिल सकता है.

घरेलू उड़ानों के लिए नियम क्या कहते हैं?

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन सीधे तौर पर घरेलू फ्लाइट्स पर लागू नहीं होता. लेकिन भारत में DGCA के दिशा निर्देशों के तहत यात्रियों की सुरक्षा तय की गई है. ज्यादातर भारतीय एयरलाइंस घरेलू उड़ानों में भी यात्रियों को एक्सीडेंट कवर देती हैं. मुआवजे की रकम एयरलाइंस और इंश्योरेंस पॉलिसी के हिसाब से अलग हो सकती है,.लेकिन आम तौर पर यह करीब 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक होती है. 

कई मामलों में यह जिम्मेदारी एयरलाइन और उसकी इंश्योरेंस कंपनी की साझा होती है. अगर यात्री ने टिकट बुक करते समय अलग से ट्रैवल इंश्योरेंस लिया है. तो बेसिक कवर के अलावा एक्स्ट्रा मुआवजा भी मिल सकता है. इसलिए फ्लाइट टिकट बुक करते वक्त इंश्योरेंस ऑप्शन जरूर चेक करना समझदारी भरा कदम होता है.

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