लो-कॉस्ट EMI के नाम पर कैसे बढ़ जाता है आपका खर्च? जानिए इसके पीछे का पूरा गणित
EMI Trap Alert: EMI सुनने में जितनी आसान लगती है, हकीकत में उतनी सीधी नहीं होती है. कम किस्तों के पीछे छिपे चार्ज आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकते हैं. इसलिए सही जानकारी का होना बहुत जरूरी है.

- अधिक EMI लेने से भविष्य में बड़े लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
Low Cost EMI Trap Alert: अक्सर जैसा दिखता है वैसा होता नहीं. कम किस्तों के विकल्प का ऑफर अक्सर कुछ ऐसे शुरू होता "सिर्फ 2,999 रुपये महीना" ऊपरी तौर पर यह आसान और संभालने लायक लगता है. लेकिन यहीं से असली भ्रम शुरू होता है, क्योंकि लो-कॉस्ट EMI का मतलब हमेशा कम खर्च होना नहीं होता. कई मामलों में आप अपनी तय रकम से ज्यादा खर्च कर देते हैं ज़रूरी नहीं कि ब्याज की वजह से, बल्कि इसलिए क्योंकि ये स्कीमें जिस तरीके से बनाई जाती हैं, वही आपको ज्यादा खर्च करवाती हैं और आपको पता भी नहीं चलता.
लो-कॉस्ट EMI का असली मतलब क्या है?
अब समझते हैं लो-कॉस्ट EMI का असली मतलब क्या है. ज्यादातर लो-कॉस्ट EMI ऑफर को “ज़ीरो इंटरेस्ट” कहकर प्रचारित किया जाता है. यह सबसे बड़े छिपे हुए खर्चों में से एक है. तकनीकी रूप से यह सही भी हो सकता है. लेकिन असली गेम इसका परदे के पीछे शुरू होता है.असल में ब्याज का पैसा अक्सर प्रोडक्ट की कीमत में जोड़ दिया जाता है या फिर डिस्काउंट कम करके वसूला जाता है.
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कई बार अगर आप पूरा पैसा एक साथ देते तो आपको कैशबैक या छूट मिल सकती थी, लेकिन EMI चुनने पर वह फायदा नहीं मिलता. यानी आपको अलग से ब्याज दिखता नहीं है, फिर भी आप किसी न किसी तरीके से उसका पैसा चुका रहे होते हैं.
कई EMI ट्रांजैक्शन में प्रोसेसिंग फीस, उस पर GST या डॉक्यूमेंटेशन चार्ज भी शामिल होते हैं. अलग-अलग देखें तो ये रकम छोटी लगती है कहीं ₹199 तो कहीं ₹299. लेकिन अगर आप बार-बार EMI का इस्तेमाल करते हैं तो ये छोटे-छोटे खर्च मिलकर बड़ा खर्च बन जाते हैं. समय के साथ यही “छोटे” चार्ज चुपचाप आपके कुल खर्च को बढ़ा देते हैं.
बैंक लोन देने से कब मना करता है?
कर्ज़ तो आखिर में कर्ज़ ही होता है . अब उससे आप नए रूप में EMI का नाम क्यों न दे दें. EMI का एक और असर आपकी उधार लेने की प्रोफाइल पर पड़ता है. अगर आपके ऊपर एक से ज्यादा EMI चल रही हैं तो बैंक आपको ऐसा व्यक्ति मान सकते हैं जिस पर पहले से ही ज्यादा कर्ज है, भले ही आप सभी किस्तें समय पर भर रहे हों. इसका नुकसान यह हो सकता है कि भविष्य में बड़े लोन, जैसे होम लोन, मिलने की संभावना कम हो जाए या शर्तें सख्त हो जाएं.
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आजकल की भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में EMI अब आम बात है. हर छोटी बड़ी चीजों के लिए लोग अब EMI ले रहे है ऐसे में खुद के काबू पाना बहुत जरूरी है EMI चुनने से पहले खुद से एक सवाल पूछें कि अगर आपको आज पूरे पैसे एक साथ देने पड़ें, तो क्या आप यह चीज़ खरीदेंगे? अगर जवाब “नहीं” है तो थोड़ा रुककर सोचने की जरूरत है.

























