Paternity Leave: गोल्डमैन सैश कंपनी के पूर्व सीनियर वीपी जोनाथन रीव्स को नौकरी से निकाले जाने के मामले में बड़ी राहत मिली है. लंदन के एक रोजगार ट्रिब्यूनल ने बैंक को उन्हें 1.45 मिलियन पाउंड यानी करीब 18.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने माना कि रीव्स को गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया है, उनके साथ लैंगिक भेदभाव भी किया गया है.

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क्या है पूरा मामला?दरअसल ये पूरा मामला साल 2022 का है जब जोनाथन रीव्स ने को नौकरी से निकाला गया था. जोनाथन करीब 15 सालों से गोल्मैन सैश के साथ कर रहे थे. वो लंदन स्थित बैंक की कम्प्लायंस डिविजन में बतौर सीनियन वाइस प्रेसिडेंट और कंट्रोल रूम के डेप्यूटी हैड थे. लेकिन साल 2022 में जब उनका दूसरा बच्चा हुआ, तब उन्होंने छह महीने की पैटरनिटी लीव लेने की जानकारी कंपनी को दी, तब कंपनी कहा कि इस समय में उनकी नौकरी भी जा सकती है.

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जोनाथन की पैटरनिटी लीव 1 जून 2022 को खत्म हुई और जब उन्होंने वापस ऑफिस जॉइन करना चाहा तो उन्हें बताया गया कि उनकी नौकरी जा चुकी है. कुछ समय बाद 4 सितंबर 2022 को उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.

मामले की हुई शिकायतअपने साथ जो कुछ भी हुआ उसकी शिकायत रीव्स ने लंदन के रोजगार ट्रिब्यूनल में की. जिसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए टिब्यूनल ने माना कि रीव्स को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया बिलकुल भी सही नहीं थी. साथ ही, पैटरनिटी लीव लेने के कारण उनके साथ जो लैंगिक भेदभाव हुआ है, वो भी सही नहीं है. इसी के चलते ट्रिब्यूनल ने कंपनी को उन्हें मुआवजा देने के लिए कहा.

ट्रिब्यूनल की मानें तो ये मुआवजा सिर्फ नौकरी जाने के नुकसान के लिए नहीं है बल्कि रीव्स के भविष्य के करियर, कमाई और मानसिक परेशानी को भी ध्यान में रखते हुए दिलवाया जा रहा है. 

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कंपनी ने दी सफाईवहीं इस पूरे मामले पर गोल्डमैन सैश ने ट्रिब्यूनल के फैसले असहमति जताई. बैंक ने कहा कि उसकी पैटरनिटी लीव नीति सभी माता-पिता के लिए समान है और कर्मचारियों को पूरी 26 हफ्ते की पेड पैरेंटल लीव दी जाती है. बैंक ने ये भी कहा कि वो फैसले से पूरी तरह असहमत है.