EPFO Pension Calculation: देश में लाखों कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी का हिस्सा EPFO में जमा करते हैं. खासकर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए यह रिटायरमेंट प्लानिंग का बड़ा जरिया है. कर्मचारियों की सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा उनके पीएफ में जाता है. 

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जिसमें से एक हिस्सा पेंशन स्कीम यानी EPS में जमा होता है. रिटायरमेंट के बाद यही रकम आपको मंथली पेंशन के तौर पर मिलती है. लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर आपको कितनी पेंशन मिलेगी और उसका कैलकुलेशन कैसे होता है. चलिए आपको बताते हैं इसका पूरा कैलकुलेशन.

कब मिलती है पेंशन?

हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत पीएफ में जमा होता है. इसमें से 8.33 प्रतिशत हिस्सा एम्प्लॉई पेंशन स्कीम में ट्रांसफर किया जाता है. जबकि 3.67 प्रतिशत पीएफ अकाउंट में रहता है. पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी जरूरी है. नियमों के मुताबिक पेंशन की नार्मल शुरुआत 58 साल की उम्र के बाद होती है. नौकरी के दौरान जितने साल आप कंट्रीब्यूशन करते हैं. वही आपकी पेंशन के लिए सर्विस मानी जाती है. इसी आधार पर आगे मंथली पेंशन तय होती है.

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क्या है पेंशन का फॉर्म्युला?

EPFO ने पेंशन तय करने के लिए साफ फॉर्म्युला बनाया है. मंथली पेंशन निकालने का फॉर्म्युला है: पेंशन के लिए सैलरी X पेंशन के लिए सर्विस / 70. यहां पेंशन के लिए सैलरी का मतलब आपके आखिरी 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है. यानी रिटायरमेंट से पहले के पांच साल का एवरेज सैलरी लिया जाता है. पेंशन के लिए सर्विस में आपके कुल योगदान वाले साल शामिल होते हैं. बशर्ते कम से कम 10 साल पूरे हों. इसी कैलकुलेशन से हर कर्मचारी की मंथली पेंशन तय की जाती है.

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कैसे करेंगे कैलकुलेशन?

मान लीजिए किसी कर्मचारी की पेंशन के लिए सैलरी 15000 रुपये है और उसने 10 साल तक कंट्रीब्यूशन दिया है. फॉर्म्युला के मुताबिक 15000X10/70 करेंगे. ऐसे में मंथली पेंशन करीब 2143 रुपये बनेगी. अगर आपकी सैलरी ज्यादा है या सर्विस टैन्योर 20 या 25 साल है. तो पेंशन भी उसी रेशियो में बढ़ेगी. यानी जितने लंबे समय तक कंट्रीब्यूशन और जितनी ज्यादा सैलरी, उतनी ज्यादा मंथली पेंशन. रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय इस फॉर्म्युला को समझना काफी जरूरी है.

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