नौकरी करते हैं तो आपकी सैलरी से भी हर महीने पीएफ कटता होगा और यही पीएफ का पैसा भविष्य में आपकी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा. ऐसे में पीएफ से जुड़ी कोई भी अहम बात जितनी जरूरी किसी कर्मचारी के लिए होती है, उतनी ही जरूरी कंपनियों के लिए भी होती है. अगर आपका भी काम कर्मचारियों की सैलरी और पीएफ से जुड़ी चीजों को देखना है तो ये खबर आपके लिए है. 

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दरअसल, EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सितंबर 2026 के पीएफ रिटर्न यानी ECR को जमा करने की लास्ट डेट बढ़ा दी है. आखिरी तारीख अब 31 अक्टूबर कर दी गई है. यानी अब पीएफ रिटर्न जमा करने के लिए छह दिन का समय बचा है. 

ECR में क्या देनी होती है जानकारी?

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कई लोगों को इस बारे में जानकारी न हो कि आखिर ECR के जरिए कंपनियों का क्या जानकारी देनी होती है? तो जान लें कि इसके जरिए कंपनियों को पीएफ योगदान से जुड़ी जानकारी और कर्मचारी की सैलरी से जुड़ी जानकारी जमा करनी होती है. वहीं इसमें EPF,EPS और EDLI के तहत वेतन और योगदान का विवरण शामिल होता है.

पहले क्या थी डेडलाइन?

बता दें कि पहले पीएफ जमा करने के लिए डेडलाइन 15 अक्टूबर थी. लेकिन अब जब तारीख बढ़ा दी गई है तो नियोक्ताओं के पास रिटर्न जमा करने के लिए अतिरिक्त समय है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि आखिर EPF जमा करने की डेडलाइन को बढ़ाया क्यों गया है?

डेडलाइन क्यों बढ़ाई गई?

डेडलाइन 31 अक्टूबर करने के पीछे कारण है. 17 सितंबर को सरकार ने पीएफ अनिवार्य होने की वेतन सीमा में बदलाव किया था. मतलब पहले सीमा 15000 रुपये थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 25000 रुपये कर दिया. ऐसे में अब ये बदलाव महीने के बीच में लिया गया तो कंपनियों को दो अलग-अलग नियमों के आधार पर पेरोल और पीएफ की गणना करनी प़ड़ रही है.

यही कारण है कि EPFO ने सितंबर 2026 के पीएफ रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख को 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर किया, ताकि नियोक्ताओं को अतिरिक्त समय मिल सकें. ऐसे में लेकिन अब पीएफ रिटर्न जमा करने के लिए केवल छह दिन का ही समय बचा है.

डेडलाइन निकलने पर क्या होगा?

अब जब कंपनी के पास पीएफ रिटर्न जमा करने के लिए पहले से ही अतिरिक्त समय है, लेकिन अगर कोई कंपनी 31 अक्टूबर 2026 की बढ़ी हुई डेडलाइन के बाद भी सितंबर का पीएफ रिटर्न जमा नहीं कर पाती है तो ऐसी स्थिति में कार्रवाई हो सकती है. 

  • पीएफ जमा करने में देरी होने पर EPF कानून की धारा 7Q के तहत 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लग सकता है.
  • इसके अलावा धारा 14B के तहत लेट होने पर अवधि के मुताबिक पेंडिंग रकम पर हर्जाना लगाया जा सकता है.
  • वहीं अगर पीएफ रिटर्न जानबूझकर जमा नहीं किया जाता तो ऐसी स्थिति में कंपनी के खिलाफ कार्रवाई तक हो सकती है. 

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