हर नौकरी करने वाले कर्मचारी के लिए उसकी सैलरी से हर महीने कटने वाला PF काफी जरूरी होता है, क्योंकि यही पीएफ का पैसा उनको रिटायरमेंट के बाद काम आता है. ऐसे में हर कर्मचारी के लिए पीएफ से जुड़े हर छोटे-बड़े अपडेट की जानकारी होनी चाहिए.

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इस बीच कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने सितंबर महीने के पीएफ रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन को बढ़ा दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर डेडलाइन क्यों बढ़ाई गई इसके पीछे क्या कारण है?

नियोक्ताओं को अतिरिक्त समय मिला

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EPF, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा (EDLI) के तहत कंपनियों को हर महीने कर्मचारियों की सैलरी और पीएफ में जमा होने वाली राशि से जुड़ी जानकारी देनी होती है और इसी जानकारी को ECR यानी इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न कहा जाता है. अब जब पीएफ रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन बढ़ा दी गई तो ऐसे में अब नियोक्ताओं को अतिरिक्त समय मिल गया है. 

15 अक्टूबर तक करना था फाइल

बता दें कि पीएफ रिटर्न फाइल नियोक्ताओं को आज यानी 15 अक्टूबर तक करना था, लेकिन अब इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया गया है. यानी अब इस काम के लिए नियोक्ताओं के पास 31 अक्टूबर तक का समय है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ही यही है कि आखिर डेडलाइन क्यों बढ़ाई गई है?

क्यों बढ़ाई गई डेडलाइन?

EPFO ने पीएफ रिटर्न फाइल करने की तारीख को इसलिए बढ़ाया है, क्योंकि 17 सितंबर को वेतन सीमा में बढ़ोतरी की गई. सरकार ने वेतन सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गया. अब ऐसे बीच महीने में ये बदलाव हुआ तो इसी वजह से नियोक्ताओं को सितंबर के पीएफ का हिसाब दो अलग-अलग अवधियों के हिसाब से लगाना होगा. यही वजह ही की पीएफ रिटर्न फाइल करने के लिए नियोक्ताओं को अतिरिक्त समय दिया गया है. 

नियोक्ता के लिए जरूरी बातें

  • अब जब भी रिटर्न जमा करें तो पहले ही कर्मचारियों की सैलरी और पीएफ का योगदान का मिलान करना न भूलें.
  • अगर रिटर्न में गलती होगी तो उसे सुधारने का प्रोसेस करना पड़ सकता है.
  • बेहतर होगा कि आखिर तारीख का इंतजार न करके रिकॉर्ड की जांच अच्छे से कर ली जाए.

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