ITR में छुपाई ये बात, कर्मचारी पर इनकम टैक्स ने लगाया 10 लाख का जुर्माना, कोर्ट पहुंच गया मामला
ITR Fine: वेदांता लिमिटेड के एक कर्मचारी को ITR फाइलिंग के दौरान ESOP की जानकारी छुपाना भारी पड़ गया. जिसके चलते विभाग ने कर्मचारी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

Employee Fined 10 Lakhs: आयकर विभाग से रिटर्न फाइल करने के दौरान एक कर्मचारी को जानकारी छुपाना काफी महंगा पड़ा है. एक विदेशी कंपनी के कर्मचारी ने आयकर रिटर्न में ESOP (Employee Stock Ownership Plans) की जानकारी छुपाई, जिसके चलते विभाग ने उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है. जिसके बाद ये कर्मचारी मामले को ITAT चेन्नई में लेकर गए हैं, इसके बाद ही ये मामला सुर्खियों में आया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मिस्टर कुमार नाम के एक कर्मचारी वेदांता लिमिटेड के साथ काम करते थे. इस दौरान उन्हें मेन कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी (यूके) से कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ESOP) मिले थे. इन शेयरों का मैनेजमेंट सैन फिड्यूशरी सर्विसेज लिमिटेड, जर्सी के जरिए किया जाता था. इसके बाद, कुमार ने 22 फरवरी, 2018 को वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए अपना ITR भरा. इस दौरान उन्होंने अपने फॉरेन एसेट्स की जानकारी में RSOP शेयरों के बारे में जानकारी नहीं दी थी. इसे एक बहुत जरूरी गलती माना जाता है.
आयकर विभाग की कार्रवाई
कर्मचारी के ये जानकारी छुपाने के चलते वो मुश्किल में पड़ गए और आयकर विभाग ने काला धन अधिनियम की धारा 43 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की. इस दौरान विभाग ने मिस्टर कुमार के ऊपर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. अपील आयुक्त (ए) ने टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा लगाए गए जुर्माने को बरकरार रखा. इसके बाद कर्मचारी ने इस मामले को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) चेन्नई में ले गए. कर्मचारी के ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश श्रीधर हेगड़े ने ITAT को बताया कि FA में ESOP का खुलासा न करना पूरी तरह से एक्सिडेंटल था, ये सबकुछ केवल मिस्टर कुमार को कंफ्यूजन की वजह से हुआ है.
कर्मचारी के हक में आया फैसला
इस मामले की सुनवाई के बाद चेन्नई ITAT ने 24 मार्च, 2026 को मामले की सुनवाई की और 1 अप्रैल, 2026 को कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि मिस्टर कुमार को ESOP एम्प्लॉयी कम्पंसेशन के हिस्से के रूप में मिले थे और इस पर टीडीएस भी काटा जाता था. इन शेयरों से सा 2019-20 में टैक्स लगाया गया था ऐसे में ये विदेशी सम्पत्ति लेनदेन के दायरे में था. ये सारी बातें कहते हुए ITAT ने इस 10 लाख के जुर्माने को रद्द कर दिया.
Source: IOCL


























