Single Window Property System:दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए सरकार एक अहम बदलाव करने की तैयारी कर रहे है. दिल्ली सरकार एक ऐसे सिंगल-विंडो सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें घर की रजिस्ट्री के साथ-साथ बिजली और पानी जैसे जरूरी कनेक्शन भी खुद-ब-खुद नए मालिक के नाम ट्रांसफर हो जाएगी. इससे नए मालिकों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ेगी. 

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पहले घर खरीदने के बाद नए मालिकों को सिर्फ रजिस्ट्री ही नहीं करनी होती, बल्कि बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं के लिए भी अलग-अलग दफ्तरों में जाकर डाक्यूमेंट्स जमा करना पड़ता था. इस पूरी प्रक्रिया में लोगों का काफी समय भी बर्बाद होता था और कागजी काम भी कागजी काम भी बढ़ जाता था.

घर खरीदारों को क्या मिलेगा फायदा?

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इस बदलाव के कारण खरीदारों को कई तरह के फायदे देखने को मिलेंगे. इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कागजी कार्रवाई कम हो जाएगी और अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचेंगे. इसके अलावा, नए मालिकों की बिजली और पानी के कनेक्शन ट्रांसफर में होने वाली परेशानी भी खत्म हो जाएगी. एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी रिकॉर्ड मिलने की वजह से धोखाधड़ी जैसी स्थिति की संभावना भी कम हो सकती है. खासकर इससे प्रॉपर्टी का मालिकाना हक लेना आसान हो सकता है. 

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सिंगल-विंडो सिस्टम से क्या बदलेगा?

  • इससे प्रॉपर्टी से जुड़े कई काम एक ही जगह पर हो सकेंगे.
  • रजिस्ट्री होते ही यूटिलिटी कनेक्शन भी नए मालिक के नाम ट्रांसफर हो जाएंगे.
  • यह सिस्टम घर खरीदने की पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बना सकता है.
  • इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित होगी.

ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग

इस प्रस्ताव में ब्लॉकचेन तकनीक का भी इस्तेमाल करने की बात कही गई है. इसका खास मकसद प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से और ज्यादा सुरक्षित बनाना है, ताकि उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके. इससे खरीदारों को लेन-देन की सही जानकारी मिल सकेगी और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को ट्रैक करना आसान होगी. हालांकि, इसका फायदा तभी देखने को मिलेगा जब इस पर सभी विभाग मिलकर काम करें.

कब शुरू होगा सिंगल विंडो सिस्टम?

सिंगल विंडो सिस्टम अभी शुरुआती चरण में है. इसे योजना के लागू होने में अभी समय लग सकता है, इसलिए फिलहाल घर खरीदने वालों पर पुराने नियम ही लागू रहेंगे. इस योजना को लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड को जोड़ना, डेटा की सुरक्षा और नई तकनीक को अपनाना होगा. इन सभी पहलुओं को ठीक से लागू करने के बाद ही यह सिस्टम पूरी तरह शुरू हो पाएगा.

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