Credit Card News: क्रेडिट कार्ड लेते समय सबसे ज्यादा ध्यान अक्सर इस बात पर जाता है कि उसकी साल की एनुअल फीस कितनी है. बाजार में 500 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक की फीस वाले कार्ड मौजूद हैं, जबकि कई कार्ड बिना किसी साल की फीस के भी मिलते हैं. ऐसे में महंगा कार्ड लेना सही है या फ्री कार्ड, इसका फैसला सिर्फ फीस देखकर नहीं किया जा सकता. असली सवाल ये है कि कार्ड से मिलने वाले फायदे आपकी जेब से जाने वाली रकम के मुकाबले कितने हैं.

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कार्ड लेने या रिन्यू कराने से पहले सिर्फ जॉइनिंग फीस देखकर फैसला नहीं करें. साल का फीस, उस पर लगने वाला टैक्स और फीस माफ कराने के लिए जरूरी साल के खर्च की सीमा भी देखनी चाहिए. RBI के नियमों के मुताबिक कार्ड जारी करने वाली कंपनियों को साल का मेंबरशिप फीस समेत सभी जरूरी चार्ज की जानकारी साफ तौर पर देनी होती है.

जो फायदा मिले, उसका इस्तेमाल भी करें

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कई प्रीमियम कार्ड एयरपोर्ट लाउंज, रिवॉर्ड पॉइंट, कैशबैक, होटल बेनिफिट, फ्यूल सेविंग और डाइनिंग-शॉपिंग ऑफर देते हैं. लेकिन इनका फायदा तभी है जब आप इन्हें इस्तेमाल करते हों. अगर साल में शायद कभी यात्रा करते हैं तो सिर्फ ट्रैवल बेनिफिट के लिए 5,000 रुपये साल का फीस देना समझदारी नहीं होगी.

कार्ड पर मिलने वाले रिवॉर्ड की असली कीमत समझना भी जरूरी है. कितने खर्च पर कितने पॉइंट मिलेंगे, उन्हें कहां इस्तेमाल कर सकते हैं और वो कब तक वैलिड रहेंगे, ये देखे रिडेम्पशन फीस, न्यूनतम पॉइंट की जरूरत और कुछ लेनदेन पर रिवॉर्ड नहीं मिलने जैसी शर्तें भी हो सकती हैं.

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काम आ सकता है फीस माफी वाला नियम

कई कार्ड फिक्स रकम खर्च करने पर अगले साल की फीस माफ कर देते हैं. अगर आपका आम खर्च पहले से ही उस सीमा तक पहुंच जाता है तो ये अच्छा फायदा हो सकता है. लेकिन सिर्फ फीस बचाने के लिए एकस्ट्रा खर्च करना नुकसान का सौदा है. 2,000 रुपये की फीस बचाने के लिए 1 लाख रुपये बेवजह खर्च करना कोई समझदारी नहीं है.

अगर आपका कोई पुराना कार्ड है और आप उसे सही तरीके से चला रहे हैं तो सिर्फ साल के फीस की वजह से उसे बंद करना जरूरी नहीं. बैंक से कम फीस वाले या लाइफटाइम फ्री कार्ड में बदलने का ऑप्शन पूछा जा सकता है.

कार्ड रखना है या नहीं, ऐसे करें फैसला

रिन्यूअल फीस देने से पहले पिछले साल मिले कैशबैक, रिवॉर्ड और उन सर्विस की सही कीमत जोड़ें जिनका आपने इस्तेमाल किया. फिर टैक्स समेत साल के फीस से इसकी तुलना करें. अगर फायदा फीस से साफ तौर पर ज्यादा है तो कार्ड रखना ठीक है. अगर फायदे का हिसाब फीस के आसपास भी नहीं पहुंच रहा, तो कार्ड को डाउनग्रेड या बदलने पर सोचे. सिर्फ प्रीमियम दिखने या दूसरों को देखकर महंगा कार्ड रखना सही फैसला नहीं है. क्रेडिट कार्ड स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि आपकी जरूरत और खर्च के हिसाब से इस्तेमाल किया जाने वाला फाइनेंशियल ऑप्शन है.

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