Credit Card Settlement: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल इन दिनों हर दूसरा व्यक्ति कर रहा है. इसकी मदद से लोगों को अपनी आर्थिक स्थिति बैलेंस करने में आसानी होती है. लेकिन कई बार हम कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर लेते हैं, जिसकी वजह से बिल भरने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. बिल समय पर न भर पाने की वजह से ब्याज बढ़ता जाता है और पेनल्टी का भी दबाव बनने लग जाता है.
ऐसी स्थिति में बैंक अक्सर ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट का ऑफर देते हैं. पहली नजर में ये काफी राहतभरा लगता है, क्योंकि इसमें कुल बकाया रकम से कम पैसे देकर मामला बंद किया जा सकता है. लेकिन इसके फायदे और नुकसान दोनों होते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है.
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क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट क्या है?जब कोई ग्राहक लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का बकाया नहीं चुका पाता, तब बैंक पूरा पैसा वसूलने की बजाय कुछ कम रकम लेकर अकाउंट बंद करने का प्रस्ताव देता है. इसे क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट कहा जाता है. इसके लिए बैंक आपको कुल बकाया राशि का 50% या 40% ही जमा करने का ऑफर देता है. इसके बाद खाता बंद कर दिया जाता है.
सैटलमेंट के Pros & Consअगर आप भी अपने कार्ड का सैटलमेंट करवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो इससे पहले आपको इसके फायदे और नुकसान दोनों के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है. यहां आपको बताते हैं कार्ड सैटलमेंट के फायदे और नुकसान:
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पहले फायदे जानें
- ग्राहक को पूरी रकम नहीं चुकानी पड़ती.
- बढ़ते ब्याज और लेट फीस से राहत मिल सकती है.
- कानूनी नोटिस या रिकवरी एजेंट नहीं कर पाएंगे परेशान.
- आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, तो राहत मिल सकती है.
नुकसान भी जान लें
- सेटलमेंट का सबसे बड़ा असर CIBIL स्कोर पर पड़ता है.
- बैंक आपके अकाउंट को सैटल्ड के रूप में रिपोर्ट करता है, ना कि क्लोज्ड या पेड़ इन फुल.
- भविष्य में लोन या नया क्रेडिट कार्ड मिलने में परेशानी हो सकती है.
- होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन की मंजूरी मुश्किल हो सकती है.
- कई बैंक ऐसे ग्राहकों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखते हैं.
अगर आपके भी क्रेडिट कार्ड का बिल ज्यादा हो गया है और आप उसे भर नहीं पा रहे हैं, तो सैटलमेंट अच्छा ऑप्शन है. लेकिन इसके फायदे और नुकसान जानने के बाद ही आप कोई फैसला करें. नहीं तो आप परेशानी में भी फंस सकते हैं.
