China Maglev Train: भारतीय रेलवे लोगों के लिए सफर का एक सुविधाजनक साधन है, जहां यात्री अपनी जरूरत और बजट के मुताबिक ट्रेन का टिकट बुक कर सकते हैं. भारतीय रेलवे ने भी पिछले कुछ सालों में कई नई आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत की है, जिससे यात्रियों का सफर कम समय में पूरा हो रहा है.
इसी कड़ी में देश की पहली मंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके पहले चरण के अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है. ऐसे में चीन की हाई-स्पीड मैगलेव तकनीक ने एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. यह बात जानकर हर कोई चौक जाएगा कि इस टेस्ट ट्रेन ने महज 5.3 सेंकड में 0 से 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ ली.
1 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर किया टेस्ट
- हुबेई की डोंगहू लेबोरेटरी में लगभग 1 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इस ट्रेन का टेस्ट किया गया.
- टेस्ट के दौरान 1.1 टन की मैगलेव ट्रेन ने केवल 5.3 सेकंड में 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर सबको हैरान कर दिया.
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क्या चीन के यात्री कर पाएंगे इस ट्रेन में सफर?
ऐसे में इस ट्रेन की रफ्तार के बारे में जानकर लोगों के मन सवाल आ रहा होगा कि क्या इस ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया गया है? तो असल में ऐसा अभी नहीं है. ये ट्रेन फिलहाल केवल टेस्ट और रिसर्च के लिए बनाई गई है.
ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोका गया
इस ट्रेन की सबसे खास बात तो यह है कि इतनी तेज रफ्तार के बाद इसको रोकना कितना मुश्किल है, लेकिन ट्रेन की स्पीड को कंट्रोल करते हुए उसे सुरक्षित तरीके से रोका गया. ट्रेन ने जितनी तेज रफ्तार पकड़ी, इसके बाद भी ट्रेन को बिना किसी परेशानी के ब्रेक लगाया गया.
चीन ही नहीं, ये देश बना रहा मैगलेव ट्रेन
क्या मैगलेव तकनीक पर केवल चीन ही काम कर रहा है? तो ऐसा नहीं है, बल्कि इस पर जापान भी अपनी चुओ शिंकानसेन मैगलेव लाइन पर काम कर रहा है, जिसको टोक्यो और नागोया के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए विकसित किया जा रहा है.
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