जिस नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में आप अपने रिटायर्मेंट के लिए पैसा जमा करते हैं, वही खाता आपकी अपनी सेहत से जुड़े खर्चो में भी काम आ जाये तो फायदा दोगुना हो जाता है. अब एनपीएस में पेंशन की बचत के साथ-साथ हेल्थ कवर को जोड़ने वाला एक नया विकल्प भी दिया जा रहा है.

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NPS स्वास्थ्य में निवेश करवाने वालों को केवल रिटायरमेंट से जुड़ी सुविधा ही नहीं बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी सुविधा भी मिल सकती है. इस योजना में कितना कवर मिलेगा, कितनी रकम देना होगी और जरूरत पड़ने पर अपने NPS पैसों में से कितनी राशि निकाल सकते हैं? जानिए इन सभी सवालों के जवाब. परिवार के किन सदस्यों को मिलेगा कवर? NPS स्वास्थ्य के तहत-

  • फैमली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा, इसमें जो भी खाताधारक होगा उसको साथ-साथ उसकी पत्नी और अधिकतम दो बच्चों को शामिल किया जा सकता है.
  • जिसमें माता-पिता इस सामान्य कवरेज का हिस्सा नहीं होंगे.
  • इस योजना में भाग लेने कि उम्र 18 से 70 साल के बीच होनी आवश्यक है. पॅालिसी के नियम और प्रिमियम के अनुसार 85 साल की उम्र तक जारी रखा जा सकता है. 

30 लाख तक का हेल्थ कवर  बीमा में सूपर टॅार-अप मॅाडल को लागू किया जायेगा, जिसका मतलब यह है कि इंश्योरेंस कंपनी से भुगतान शुरु करने से पहले तय मेडिकल खर्च कि सीमा को पूरा करना जरूरी होगा. अलग-अलग विकल्पों में 10 हजार रुपये के डिडक्टिबल पर 1 लाख रुपये, 50 हजार रुपये पर 5 लाख रुपये, 1 लाख रुपये पर 10 लाख रुपये और 3 लाख रुपये के डिडक्टिबल पर 30 लाख रुपये तक का बीमा मिल सकता है. डिडक्टिबल परिवार के सभी कवर सदस्यों के पात्र मेडिकल खर्च को मिलाकर तय किया जायेगा. 

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उम्र के हिसाब से तय होगा प्रीमियम

NPS स्वास्थ्य अकाउंट खोलते समय पहले साल का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और टैक्स, 200 रुपये प्लस टैक्स का सालाना मेंटेनेंस चार्ज और कम से कम 1 हजार रुपये NPS में निवेश करने होंगे. इसके बाद केवल 10 रुपये से भी अतिरिक्त योगदान किया जा सकता है, प्रीमियम उम्र के हिसाब से तय किया जायेगा. 

चुन सकते हैं प्रीमैच्योर एग्जिट

खाताधारक अपने NPS स्वास्थ्य के खाते में किए गए योगदान का 25 फीसदी तक पात्र मेडिकल खर्च के लिए निकाल सकता है. यह सुविधा अस्पताल में भर्ती होने के अलावा योग्य आउटपेशेंट इलाज पर भी लागू है. पात्र इलाज के खर्च के लिए रकम संबंधित अस्पताल या हेल्थकेयर प्रोवाइडर के साथ सेटल की जाएगी. बड़ी बात यह है कि अगर किसी एक अस्पताल में भर्ती होने के इलाज का खर्च 25 फीसदी निकासी सीमा से अधिक हो जाता है, तो कुछ शर्तों के तहत खाताधारक प्रीमैच्योर एग्जिट चुन सकता है.

खाताधारक की मृत्यु के बाद ही बंद हो सकता है खाता

NPS स्वास्थ्य अकाउंट सामान्य एग्जिट, समय से पहले एग्जिट, इंश्योरेंस रिन्यू कराने के लिए पर्याप्त रकम न होने या खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में बंद हो सकता है. इसका असर व्यक्ति के किसी दूसरे NPS अकाउंट पर नहीं पड़ेगा.

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