गधे पालन पर सरकार दे रही लाखों की मदद, जानिए कैसे मिलेगा फायदा?
Donkey Rearing Business: पशुपालन से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार गधा पालन पर आर्थिक सहायता दे रही है. इस योजना के तहत कैसे ले सकते हैं आर्थिक मदद. जान लीजिए तरीका.

Donkey Rearing Business: देश में आजकल कई लोग पारंपरिक नौकरी के बजाय अपना कारोबार शुरू करने की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की वजह से छोटे स्तर पर भी बिजनेस शुरू करना पहले से आसान हुआ है. खेती और पशुपालन से जुड़े कई ऐसे विकल्प सामने आए हैं. जिनसे अच्छी कमाई की जा सकती है. इन्हीं में से एक गधा पालन भी है.
जो अब धीरे धीरे एक नए बिजनेस अवसर के रूप में देखा जा रहा है. खास बात यह है कि सरकार भी इसे बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत शुरू की गई योजना में गधा पालन करने वालों को बड़ी सब्सिडी दी जा रही है. इससे कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं और ग्रामीण इलाकों में रोजगार भी बढ़ सकता है.
क्या है गधे पालने की यह योजना?
सरकार ने पशुपालन से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत यह योजना शुरू की है. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति या ग्रुप गधा पालन का प्रोजेक्ट शुरू करना चाहता है तो उसे आर्थिक सहायता मिल सकती है. योजना में कुल परियोजना लागत का लगभग आधा हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है.
कितने मिलते हैं रुपये?
सरकार की ओर से इस काम को शुरू करने के लिए अधिकतम सहायता 50 लाख रुपये तक हो सकती है.इसका मतलब यह है कि अगर किसी प्रोजेक्ट की लागत लगभग 1 करोड़ रुपये तक है. तो उसका आधा हिस्सा सरकार की ओर से दिया जा सकता है. इस योजना का मकसद पशुपालन को बिजनेस के तौर पर मजबूत करना और लोगों को नए रोजगार के अवसर देना है.
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गधा पालन शुरू करने के लिए जरूरी नियम
इस योजना के तहत गधा पालन शुरू करने के लिए कुछ तय शर्तें भी रखी गई हैं. एक यूनिट स्थापित करने के लिए मिनिमम लिमिट तय की गई है. इसमें कम से कम 50 फीमेल और 5 मेल गधों का होना जरूरी बताया गया है. इसके अलावा यह योजना देशी नस्लों के गधों पर लागू होती है. विदेशी नस्लों के लिए इसका लाभ नहीं मिलता. सब्सिडी सीधे एक साथ नहीं दी जाती. बल्कि दो स्टेज में जारी की जाती है. पहली किश्त तब मिलती है जब बैंक से लोन असेप्ट हो जाता है. तो वहीं दूसरी किश्त प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दी जाती है.
क्यों शुरू की गई यह स्कीम?
दरअसल देश में गधों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से कम हुई है. पशुगणना के आंकड़ों के मुताबिक बीते सालों में इनकी आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यही वजह है कि सरकार इस क्षेत्र को फिर से एक्टिव करना चाहती है. गधा पालन से न सिर्फ पशुधन कंसर्वेजन में मदद मिल सकती है बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है. इस योजना के जरिए सरकार लोगों को पशुपालन की ओर आकर्षित करना चाहती है.
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