Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. जिसमें अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मृत्यु हो गई. लैंडिंग के वक्त या हादसा हुआ उनका प्राइवेट प्लेन एयरपोर्ट पर उतरते वक्त ही क्रैश हो गया. अजित पवार जिला परिषद चुनावों को लेकर आज बारामती में जनसभा संबोधित करने आए थे. वहां ही यह हादसा हुआ.  

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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद इस दुर्घटना ने देशभर में सवाल उठा दिए हैं कि क्या प्राइवेट प्लेन में यात्रा करने वालों को भी इंश्योरेंस मिलता है. कितनी रकम मिलती है और किस तरह का सुरक्षा कवच होता है. चलिए आपको बताते हैं कि प्राइवेट विमान में सफर करने वाले यात्रियों का इंश्योरेंस कैसा होता है.

प्राइवेट प्लेन यात्रियों का इंश्योरेंस में मिलता है?

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद प्राइवेट प्लेन में हादसे के बाद इंश्योरेंस को लेकर के लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं. तो आपको बता दें प्राइवेट प्लेन में यात्रा करने वाले लोगों को इंश्योरेंस मिलता है लेकिन यह कस्टमाइज्ड होता है. आमतौर पर किसी भी विमान में सफर करने वाले यात्रियों का एयर कैरियर द्वारा पॉलिसी होती है. लेकिन प्राइवेट विमान में यह पॉलिसी अलग तरह की होती है. प्राइवेट विमान के मालिक या किराए पर चलाने वाली कंपनी इंश्योरेंस लेते हैं. 

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जिसमें प्लेन, क्रू और यात्री सभी कवर होते हैं. यात्रियों को मिलने वाला इंश्योरेंस कई फैक्टर्स पर आधारित होता है. जैसे पॉलिसी लिमिट, दुर्घटना का कारण, और पॉलिसी में शामिल क्लॉज़. साधारण तौर पर पॉलिसी में डेथ बेनिफिट, पर्मानेंट डिसएबिलिटी बेनिफिट और मेडिकल खर्च शामिल हो सकते हैं. पर ध्यान देने की बात यह है कि हर कंपनी हर तरह का कवर नहीं देती. कई बार यात्रियों को अलग से ट्रैवल इंश्योरेंस कराना पड़ता है. जिससे उन्हें मेडिकल क्लेम और डेथ कवरेज मिल सके.

कितनी रकम मिलती है?

जो रकम प्राइवेट फ्लाइट दुर्घटना में मिलती है वह तय पॉलिसी अमाउंट पर निर्भर करती है. आमतौर पर सरल एयरलाइंस इंश्योरेंस में व्यक्ति को लाखों रुपये का कवर मिलता है लेकिन प्राइवेट प्लेन में यह रकम पॉलिसी के टर्म्स पर अलॉट होती है. कुछ प्राइवेट पॉलिसी में डेथ बेनिफिट कई करोड़ तक हो सकती है, खासकर अगर वह हाई-प्रोफाइल व्यक्ति के लिए टेलर बनाई गयी पॉलिसी है. 

कैसे क्लेम होता है?

सबसे पहले दुर्घटना की जरूरी रिपोर्ट और एनालिसिस रिपोर्ट तैयार होती है. उसके बाद इंश्योरेंस कंपनी को आवश्यक डॉक्यूमेंट्स जैसे FIR, मेडिकल रिपोर्ट, पॉलिसी डिटेल, और मृतक व्यक्ति के बेनिफिशियरी डिटेल्स सौंपने होते हैं. क्लेम की प्रक्रिया में इंश्योरेंस कंपनी अपने स्टैंडर्ड के अनुसार जाँच करती है और अगर सब कुछ ठीक पाता है तो तय रकम का भुगतान कर देता है.

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