करीब दो दशक पहले एक व्यक्ति ने घर बनाने की उम्मीद में प्लॉट के लिए लाखों रुपये जमा किए थे. समय बीतता गया, लेकिन जिस जमीन का आवंटन किया गया था, उसका कब्जा खरीदार को नहीं मिल सका.

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बार-बार संपर्क करने और कानूनी नोटिस देने के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा. आखिरकार उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पूरी रकम ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है.

क्या है पूरा मामला?

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मामला हरियाणा के सोनीपथ स्थित कुंडली में 350 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट से जुड़ा है. शिकायतकर्ता रणबीर सिंह ने फरवरी 2006 में प्लॉट के लिए आवेदन किया था. इसके बाद 8 जुलाई साल 2006 को उन्हें आवंटन पत्र जारी किया गया. प्लॉट की मूल कीमत करीब 35.49 लाख रुपये तय की गई थी, जबकि अलग-अलग शुल्क समेत खरीदार ने कुल 37,76,700 रुपये जमा किए. इसके बावजूद उन्हें जमीन का कब्जा नहीं सौंपा गया

कब्जे के लिए लगातार करता रहा संपर्क

रणबीर सिंह के अनुसार उन्होंने कई बार डेवलपर से संपर्क कर प्लॉट का कब्जा देने की मांग की. हर बार उन्हें जल्द कब्जा मिलने का भरोसा दिया गया, लेकिन स्थिति नहीं बदली.

जनवरी 2015 में उन्होंने लिखित रूप से दोबारा प्लॉट सौंपने की मांग की. इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मार्च 2015 में कानूनी नोटिस भेजकर एक महीने के भीतर कब्जा देने को कहा गया. फिर भी उन्हें प्लॉट नहीं मिला.

आयोग ने डेवलपर की दलील नहीं मानी

मामला दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग पहुंचा. डेवलपर ने दलील दी कि प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ रास्तों के विकास में ऐसी परिस्थितियों के कारण देरी हुई, जो उसके नियंत्रण से बाहर थीं. आयोग ने कहा कि डेवलपर इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर पाया. ऐसे में आयोग ने सेवा में कमी मानी.

डेवलपर ने यह भी कहा कि शिकायत में देरी हुई है, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया. आयोग ने माना कि कब्जा न देने की स्थिति लगातार बनी रही और 2015 के कानूनी नोटिस के बाद 2016 में दायर शिकायत समय-सीमा के भीतर थी.

वैकल्पिक प्लॉट भी नहीं लिया खरीदार ने

सुनवाई के दौरान समझौते की कोशिश भी हुई. डेवलपर ने रणबीर सिंह को दूसरे प्लॉट का विकल्प दिया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. आयोग ने माना कि जब मूल प्लॉट नहीं दिया गया और वैकल्पिक जमीन भी खरीदार को मंजूर नहीं थी, तो जमा रकम वापस करना उचित होगा.

6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानी होगी रकम

आयोग ने डेवलपर को 37,76,700 रुपये वापस करने का निर्देश दिया है. इस रकम पर भुगतान की संबंधित तारीखों से वास्तविक वापसी तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा. इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर 50 हजार रुपये अलग से देने होंगे. कंपनी को यह भुगतान 21 मार्च 2027 तक छह बराबर मासिक किस्तों में करने का समय दिया गया है.

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