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100 दिन की Thackeray सरकार, जानिए कब-कब और कैसे गिरने से बची Thackeray सरकार |ABP Uncut

ABP News Bureau   |  04 Mar 2020 08:33 PM (IST)

Uddhav Thackeray के नेतृत्व में महाराष्ट्र के महाविकास गठबंधन सरकार को 100 दिन पूरे हो रहे हैं. पिछले साल 28 नंवबर को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ ली थी. ठाकरे का मुख्यमंत्री बनना कई मायनों में ऐतिहासिक था. एक तो ये सरकार तीन विपरीथ विचारधाराओं की पार्टियों के एक साथ आने से बनी थी. दूसरा सरकार बनाने के लिये Shiv Sena को अपने आक्रमक हिंदुत्व की विचारधारा पर नरम होना पड़ा. तीसरा इन तीनों पार्टियों के साथ आने से विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी BJP विपक्ष में चली गई और चौथा शरद पवार ने फिर एक बार महाराष्ट्र की वर्तमान सियासत में अपने आप को प्रासंगिक बना दिया. इन सौ दिनों के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब लगा कि शायद ये सरकार किसी भी वक्त गिर सकती है. कई मुद्दों पर तीनों पार्टियों में अनबन हो गई. नेताओं के बीच जुबानी जंग हुई, लेकिन आखिरकार बात ज्यादा बिगड़ने से पहले ही मामला संभाल लिया जाता. सत्ता की डोर ने तीनों पार्टियों को एक साथ बनाये रखा. शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बीच आपसी तालमेल ने सरकार को खतरे में पड़ने से बचा लिया. एक नजर डालते हैं उन मसलों पर जब सरकार में शामिल पार्टियों के बीच आपसी विवाद हो गया और गोली बगल से निकल गई. Shiv Sena के लिये सबसे पहली चुनौती बनकर आया नागरिकता संशोधन बिल. जब ये बिल लोकसभा में पेश हुआ तो शिवसेना ने इसके पक्ष में वोट किया, लेकिन बात तब बिगड़ गई जब Congress और NCP ने इस बिल के प्रति अपना विरोध जताया. नतीजा ये हुआ कि जिस Shiv Sena ने लोकसभा में बिल के पक्ष में वोट दिया था उसने महाराष्ट्र सरकार में अपनी साथी पार्टियों का विरोध देखते हुए राज्यसभा में अपना रूख बदल लिया और बिल के लिये होने वाले मतदान में शामिल ही नही हुई. इस पर गृहमंत्री Amit Shah ने कटाक्ष किया कि महाराष्ट्र की जनता जानना चाहती है कि रातोंरात Shiv Sena का इस मसले पर स्टैंड कैसे बदल गया. इसके बाद फिर एक बार शिवसेना के रूख में बदलाव हुआ. सामना को दिये एक इंटरव्यू में Uddhav Thackeray ने कहा कि इस कानून के प्रति उनका विरोध नहीं है. इस कानून को लेकर लोगों में गलतफहमी हुई है.
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