Delhi Railway Station Stampede: प्रयागराज से दिल्ली..बदला कुछ नहीं! नई दिल्ली भगदड़ के 'वो' विलेन!
लगता है कि रेलवे, प्रशासन, सरकार और सिस्टम सबको ऐसे दृश्य देखने की आदत सी हो गई है...कभी प्रयागराज महाकुंभ में हादसा होता है...सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 30 लोगों की जान चली जाती है...फिर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ होती है...18 लोग फिर दम तोड़ देते हैं...कुछ दिन तक चारों तरफ चीख-पुकार मचता है...आंसुओं और दर्द का सैलाब उठता है...जिनके अपने उनसे दूर जाते हैं वो सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हैं...गुस्सा निकालते हैं...इसके बाद मरहम के तौर पर मुआवजे का ऐलान किया जाता है...जांच समितियां, न्यायिक आयोग और उससे भी कड़े बयान दिए जाते हैं...इसके बाद क्या होता है...मामला फाइलों में दब जाता है और फिर देश एक और नए हादसे का इंतजार करता है....कहना गलत नहीं होगा कि हमारे सरकारी विभाग, सरकारी मशीनरी और सरकारों ने इसे एक परंपरा बना लिया है और पूरी लगन और संकल्प के साथ वो इस परंपरा की पूर्ति कर रहे हैं...बस जगह बदलती है...कभी संगम नगरी प्रयागराज में निर्दोष समय से पहले लापरवाही की मौत मारे जाते हैं...तो कभी वो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर नाकाम सिस्टम के गुनाहों की भेंट चढ़ जाते हैं...लेकिन अब बहुत हुआ...अब ये लापरवाही और बदइंतजामी देश बर्दाश्त नहीं करेगा इसलिए आज abp न्यूज़ उन चेहरों से पर्दा उठाएगा..
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