नेपाल के त्रिशूली नदी किनारे बसे लोगों की जिंदगी इन दिनों बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रही है. नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार और उससे ऊपर के इलाकों में लोग अब रात को चैन से सो भी नहीं पा रहे हैं. हालात इतने खराब हैं कि लोग जरूरी कागजात, थोड़ा सूखा खाना और पानी की बोतल हमेशा दरवाजे के पास रखकर सोते हैं. जूते पहने रहते हैं और मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज करके हाथ में पकड़े रहते हैं, ताकि नदी का पानी बढ़ने की खबर मिलते ही तुरंत भाग सकें. यह कहानी सुनकर ही अंदाजा लग जाता है कि लोग किस डर के साये में जी रहे हैं.

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जब नदी चढ़ती है तो पहाड़ पर भागते हैं लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब त्रिशूली नदी का पानी बढ़ता है, तो लोग तुरंत पहाड़ी की तरफ ऊपर भागते हैं. जैसे ही पानी उतरता है, वे सावधानी से नीचे अपने घरों और दुकानों की तरफ लौटते हैं. लेकिन थोड़ी देर बाद ऊपर से फिर चेतावनी आती है और यही सिलसिला बार-बार दोहराया जा रहा है. एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि पिछली रात से अब तक वे चार बार पहाड़ी पर चढ़ चुके हैं. नदी किनारे जो दुकानें और घर सबसे पास बने थे, वे तो पहले ही पानी में बह चुके हैं. रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे खबर फैली कि ऊपर भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बहुत बढ़ गया है, जिसके बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को नदी से दूर रहने और सुरक्षित जगह जाने की चेतावनी दी.

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रातें डरावनी, दिन में भी नहीं मिलता चैन

इलाके में रहने वालों के लिए रात का समय सबसे मुश्किल होता है. एक स्कूल टीचर ने बताया कि जब भी फोन पर ग्रुप मैसेज आता है, तो दिल की धड़कन तेज हो जाती है.  बच्चे थक चुके हैं, बड़े-बुजुर्ग चिंता में हैं और कोई भी रात को कपड़े उतारकर सोने की हिम्मत नहीं करता. बिजली बार-बार जाती रहती है और पूरी घाटी में अंधेरा छा जाता है, ऐसे में नदी की गरजती आवाज ही लोगों को बताती है कि हालात कैसे बदल रहे हैं. राहत कर्मियों का कहना है कि यह डर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी बन गया है. हैरानी की बात यह है कि नेपाल के बुनियादी ढांचा मंत्री हेलीकॉप्टर से त्रिशूली बाजार पहुंचे थे, लेकिन उन्हें रुकने के लिए कहीं जगह ही नहीं मिली और कुछ घंटों बाद ही काठमांडू लौटना पड़ा. 

इस पूरी आफत की एक बड़ी वजह ग्लेशियर से जुड़ी घटना भी रही. लांगटांग री की उत्तरी दीवार पर हुए हिमस्खलन के बाद भोटे कोशी नदी में बाढ़ आई थी, जिससे नेपाल-चीन सीमा के पास एक बैरियर झील बन गई थी. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया था, जिससे नीचे की तरफ अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ था. हालांकि राहत की बात यह रही कि यह झील अपने आप स्वाभाविक रूप से खाली हो गई. 

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