प्रकृति का रौद्र रूप जब भी सामने आता है, अपने पीछे सिर्फ बर्बादी और खौफनाक सन्नाटा छोड़ जाता है. नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आए भयंकर सैलाब और लैंडस्लाइड ने एक बार फिर कुदरत के उसी खौफनाक रूप का अहसास कराया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर द्वारा शेयर किया गया दिल दहला देने वाला वीडियो इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें दिख रहा है कि तबाही से ठीक पहले की खामोशी को चीरता हुआ पानी का यह उफान पूरे इलाके को अपनी आगोश में लेने के लिए बेताब दिखा.
कैमरे में कैद हुआ बर्बादी का भयानक मंजर
वायरल वीडियो की शुरुआत में सब कुछ बेहद शांत और सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अगले ही सेकंड पहाड़ों को चीरता हुआ मटमैला पानी, भारी मलबा और बड़े-बड़े पत्थर नीचे की ओर बहने लगते हैं. सैलाब की रफ्तार और पानी का वेग इतना भयानक था कि नदी किनारे बने बहुमंजिला पक्के मकान, दुकानें, गाड़ियां और लोहे के मजबूत पुल सेकंडों में जलमग्न होकर ताश के पत्तों की तरह ढह गए. इस खौफनाक दृश्य को देखकर किसी की भी रूह कांप जाए.
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रसुवा और तिब्बत बॉर्डर पर हाहाकार
नेपाल और तिब्बत सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी तथा ग्यिरोंग पोर्ट के पास से शुरू हुई इस अचानक आपदा ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के तटीय इलाकों में पानी का स्तर अचानक रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया, जिससे टिमुरे बॉर्डर मार्केट और आसपास की रिहायशी बस्तियां पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गईं. इस अचानक आई बाढ़ में कई लोगों के बह जाने की आशंका है, जबकि सैकड़ों स्थानीय नागरिक और पर्यटक अब भी प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं. मुख्य रास्तों और संपर्क पुलों के बह जाने से राहत टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
आखिर क्यों बनी हिमालय में ऐसी जलप्रलय?
हिमालयी इलाकों की बेहद नाजुक भू-बनावट और तेजी से बदलता मौसम ऐसी तबाही की मुख्य वजह बन रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक तिब्बत के ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश, पहाड़ों में लैंडस्लाइड से नदी का प्रवाह बाधित होने और संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट के कारण यह जल-प्रलय आई है. संकरे पहाड़ी रास्तों से गुजरते समय मलबे से भरे इस सैलाब की विनाशकारी क्षमता कई गुना बढ़ गई. नेपाल का यह मंजर पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक बड़ा अलर्ट है, जहां जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए मजबूत अर्ली वार्निंग सिस्टम और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की सख्त जरूरत है.
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