जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल को सिर्फ किताबों और लेखकों का मंच नहीं माना जाता, बल्कि यह विचारों, सोच और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सबसे बड़ा उत्सव भी है. हर साल यहां कुछ न कुछ ऐसा देखने को मिल जाता है जो चर्चा का विषय बन जाता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ, लेकिन वजह कोई किताब या भाषण नहीं, बल्कि एक शख्स का पहनावा बना. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के बीच एक व्यक्ति साड़ी पहनकर पूरे आत्मविश्वास के साथ घूमता नजर आ रहा है. जैसे ही यह वीडियो सामने आया, इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कोई इसे साहस बता रहा है तो कोई इसे सामाजिक संदेश से जोड़कर देख रहा है.

Continues below advertisement

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में साड़ी पहनकर पहुंचा युवक

सोशल मीडिया पर इन दिनों जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक शख्स पारंपरिक साड़ी पहने हुए फेस्टिवल परिसर में नजर आता है. उसके चेहरे पर किसी तरह की झिझक नहीं दिखती और वह बिल्कुल सहज अंदाज में लोगों से बातचीत करता दिखाई देता है. वीडियो सामने आने के बाद लोग हैरान रह गए क्योंकि आमतौर पर साड़ी को महिलाओं के पहनावे से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन इस शख्स ने साड़ी पहनकर न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि एक बड़ी सामाजिक बहस को भी जन्म दे दिया. वीडियो में जब उससे साड़ी पहनने की वजह पूछी जाती है, तो वह बेहद शांत और सरल शब्दों में जवाब देता है कि कपड़े किसी जेंडर के नहीं होते, बल्कि संस्कृति और अभिव्यक्ति के होते हैं.

 

Continues below advertisement

साड़ी पहनने की बताई रोचक वजह

उसका कहना है कि साड़ी भारतीय परंपरा का हिस्सा है और इसे पहनना किसी भी इंसान का अधिकार है. उसने यह भी कहा कि इतिहास में पुरुषों ने भी धोती और साड़ी जैसे वस्त्र पहने हैं, इसलिए आज इसे लेकर सवाल उठाना सोच की सीमाओं को दिखाता है. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है. कई यूजर्स ने इस शख्स की तारीफ करते हुए कहा कि उसने समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी है. वहीं कुछ लोगों ने इसे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की खुली और प्रगतिशील सोच का उदाहरण बताया.

यह भी पढ़ें: शख्स ने रेलवे ट्रैक के बीच से बचाई गायों की जान, यहां देखे वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर आईं मिली जुली प्रतिक्रियाएं

हालांकि सोशल मीडिया पर हर मुद्दे की तरह इस वीडियो पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग जहां इसे आज़ादी और आत्मविश्वास का प्रतीक मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे सिर्फ वायरल होने का तरीका बता रहे हैं. लेकिन इतना तय है कि इस वीडियो ने लोगों को सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया है. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे मंच पर इस तरह का दृश्य यह दिखाता है कि आज साहित्य सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज, पहचान और विचारों की खुली बहस का जरिया भी बन चुका है.

यह भी पढ़ें: एयरपोर्ट चेक इन के बाद कहां जाता है आपका लगेज? कैमरे ने खोला सामान के सफर का चौंकाने वाला राज