गुरुग्राम में बारिश के बाद सड़कें जब इतनी डूब गईं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया, तो Cars24 ने सोचा कि क्यों न सड़क पर ही नाव चला दी जाए. कंपनी ने जलभराव वाली सड़क पर अपनी ब्रांडिंग वाली नीली नाव उतार दी. मकसद था गुरुग्राम के जलभराव पर मजेदार तरीके से तंज कसना और लोगों का ध्यान इस समस्या की तरफ खींचना. लेकिन मामला तब और मजेदार हो गया जब यह नाव सिर्फ प्रचार का हिस्सा नहीं रही, बल्कि लोगों के लिए सड़क पार करने का साधन बन गई. दावा है कि ट्रैफिक अधिकारियों ने इस मामले में कंपनी पर 50 हजार रुपये का चालान भी कर दिया.

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पहले मजाक था, फिर लोगों की सवारी बन गई नाव

Cars24 की ब्रांड, क्रिएटिव और कम्युनिकेशन प्रमुख प्राची शर्मा ने LinkedIn पर इस पूरे मामले की कहानी शेयर की. उन्होंने बताया कि कंपनी ने बारिश और जलभराव पर मजाकिया कैंपेन के तौर पर पानी में नाव उतारी थी. लेकिन कुछ ही देर में वहां फंसे लोग नाव का इस्तेमाल अपने घर और ऑफिस तक पहुंचने के लिए करने लगे. यानी जिस नाव को कंपनी ने मजाक के लिए उतारा था, वही लोगों के लिए असली ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ बन गई.

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‘Joke’ से शुरू हुआ मामला, ‘Commute’ बन गया

प्राची शर्मा ने अपनी पोस्ट में बेहद मजेदार बात कही. उन्होंने लिखा कि “एक मजाक तब मजेदार नहीं रहता, जब वह लोगों का सफर बन जाए.” मतलब साफ है. कंपनी तो गुरुग्राम के जलभराव पर मजाक कर रही थी, लेकिन लोगों की हालत ऐसी थी कि उन्हें सच में नाव की जरूरत पड़ गई. सड़क पर पानी इतना भर गया था कि कुछ लोगों के लिए नाव से जाना पैदल जाने से आसान हो गया.

नाव चलाने पर 50 हजार का चालान!

कंपनी का दावा है कि इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब ट्रैफिक अधिकारियों ने नाव उतारने पर 50 हजार रुपये का चालान कर दिया. प्राची शर्मा ने लिखा कि कंपनी नाव का खर्च तो उठा ही चुकी है और अगर लोगों की मदद के लिए उसे दोबारा पानी में उतारना पड़ा तो चालान भरने के लिए भी तैयार है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि अब बस इंतजार है कि कोई पानी के लिए भी बिल भेज दे.

सोशल मीडिया पर लोग बोले- नाव गलत थी या हालात?

Cars24 की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने कंपनी के इस स्टंट को शानदार मार्केटिंग बताया, तो कुछ ने चालान को लेकर सवाल खड़े कर दिए. एक यूजर ने पूछा कि अगर सच में 50 हजार रुपये का चालान हुआ है तो यह भी बताया जाए कि किस नियम के तहत नाव पर चालान किया गया. वहीं एक दूसरे यूजर ने कहा कि असली कहानी नाव नहीं, बल्कि यह है कि लोगों को नाव की जरूरत पड़ गई.

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‘Cars24 की नाव’ ने गुरुग्राम की पोल खोल दी?

कई लोगों ने कहा कि कंपनी का कैंपेन भले ही मजाक के तौर पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसने गुरुग्राम की जलभराव की समस्या पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. जब लोग सड़क पर गाड़ी की जगह नाव से सफर करने लगें, तो समझा जा सकता है कि पानी कितना भरा होगा. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने पुराने समय का उदाहरण देते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान कई शहरों में मुख्य सड़कों पर नाव चलना आम बात रही है. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि कंपनी को इस मौके का इस्तेमाल सिर्फ प्रचार के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान समस्या की तरफ खींचने के लिए भी करना चाहिए.

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