मौत को हमेशा जीवन का अंतिम पड़ाव माना गया है. आम धारणा यही रही है कि जैसे ही दिल धड़कना बंद करता है, इंसान की चेतना भी खत्म हो जाती है. लेकिन अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस सोच को चुनौती दी है. शोध में संकेत मिले हैं कि दिल रुकने के बाद भी कुछ समय तक दिमाग सक्रिय रह सकता है और व्यक्ति को अपने आसपास की जानकारी का एहसास हो सकता है. यह दावा न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि जीवन और मृत्यु को लेकर हमारी समझ को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर करता है.

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क्या कहता है नया अध्ययन?

यह अध्ययन ‘Resuscitation’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसमें बताया गया है कि जिन मरीजों का दिल धड़कना बंद हो गया था और जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित किया गया, उनमें से कुछ में पुनर्जीवन यानी CPR के दौरान दिमागी गतिविधि दर्ज की गई. शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ मामलों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक EEG में गामा, डेल्टा, थीटा, अल्फा और बीटा ब्रेन वेव्स के संकेत मिले. ये वही तरंगें हैं जो सामान्य रूप से सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं.

डॉ. सैम पर्निया की अगुवाई में शोध

इस रिसर्च का नेतृत्व न्यूयॉर्क के NYU लैंगोन मेडिकल सेंटर के डॉ. सैम पर्निया ने किया. उनकी टीम ने अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों का अध्ययन किया. कई मरीजों ने बताया कि जब उनका दिल धड़क नहीं रहा था, तब भी उन्हें कुछ यादें और अनुभव महसूस हुए. डॉ. पर्निया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के करीब 10 मिनट बाद दिमाग को स्थायी नुकसान हो जाता है, लेकिन शोध में पाया गया कि दिमाग CPR के दौरान भी इलेक्ट्रिकल रिकवरी के संकेत दिखा सकता है.

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40 प्रतिशत लोगों ने महसूस की जागरूकता

अध्ययन में शामिल करीब 40 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी स्तर पर जागरूकता महसूस करने की बात कही. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे अपने शरीर से अलग हो गए हों और अस्पताल के कमरे में हो रही गतिविधियों को देख या समझ रहे हों. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये अनुभव सपनों, भ्रम या वहम से अलग थे.

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