कल्पना कीजिए कि अमेरिका के किसी कोने में बैठे कुछ गोरे कलाकार, हाथ में हारमोनियम और सामने तबला सजाकर, पूरी शिद्दत और सही उच्चारण के साथ 'उनके अंदाजे करम, उनपे वो आना दिल का' जैसा मुश्किल कलाम गा रहे हों. यह न केवल देखने में अद्भुत है, बल्कि सुनने में इतना मंत्रमुग्ध कर देने वाला है कि एक पल के लिए यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये कलाकार उपमहाद्वीप के नहीं हैं. सुर, ताल, लय और सरगम का ऐसा सटीक संगम कि मानों उन्होंने अपनी रूह इस कव्वाली में झोंक दी हो. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है और अब तक लाखों लोग इसे देख चुके हैं.

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अमेरिकी कलाकारों ने गाया सूफी गाना

सोशल मीडिया आज के दौर में एक ऐसा मंच बन चुका है जहां हुनर को सीमाओं की बेड़ियों में नहीं जकड़ा जा सकता. हालिया वायरल वीडियो में नजर आ रहे कलाकार, जो मूल रूप से अमेरिकी बताए जा रहे हैं, सूफी संगीत और कव्वाली की बारीकियों को जिस तरह पेश कर रहे हैं, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है. वीडियो में देखा जा सकता है कि मुख्य कव्वाल अपनी पूरी ऊर्जा के साथ कलाम पढ़ रहे हैं, जबकि साथ बैठे अन्य कलाकार तबले और हारमोनियम पर उनका बखूबी साथ दे रहे हैं.

सुर, ताल और लय ऐसी मानों उस्ताद गा रहे हों

इस कव्वाली की सबसे खास बात इसकी 'सरगम' और 'लय' है. आमतौर पर पश्चिमी देशों के गायकों के लिए उर्दू के शब्दों का सही उच्चारण और कव्वाली की जटिल तानें पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन इस वीडियो में जिस सफाई के साथ आलाप और तान ली गई है, उसने बड़े-बड़े संगीतकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. 'उनके अंदाजे करम, उनपे वो आना दिल का' कलाम को गाते वक्त उनके चेहरे के हाव-भाव और हाथों की हरकतें बिल्कुल उसी पारंपरिक अंदाज में हैं, जैसा हम भारतीय या पाकिस्तानी कव्वाली महफिलों में देखते हैं.

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यूजर्स रह गए हैरान, बोले ये तो नामुमकिन सा

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, दक्षिण एशियाई देशों के लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. कई यूजर्स ने लिखा कि "संगीत की कोई सरहद नहीं होती", तो कुछ ने मजाक में कहा कि "इनकी सरगम सुनकर लगता है कि ये पिछले जन्म में जरूर किसी मशहूर कव्वाल के शागिर्द रहे होंगे." लोगों का मानना है कि इन विदेशी कलाकारों ने जिस तरह इस कलाम को अंजाम दिया है, वह दक्षिण एशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है.

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