न्यूरोसर्जन्स ने पहली बार लाइव AI की मदद से ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी की, जिसमें AI ने ऑपरेशन के दौरान जरूरी नसों और ब्लड वेसल्स को पहचान कर डॉक्टरों को बताया कि किन हिस्सों को छूने से बचना चाहिए. इस सर्जरी में 48 साल के Rhys Hibbert के ब्रेन से ट्यूमर निकाला गया और उनकी आंखों की रोशनी बची रही. यह ऑपरेशन मई में लंदन के National Hospital for Neurology and Neurosurgery में किया गया था. यह हॉस्पिटल University College London Hospitals का हिस्सा है. सर्जरी की जानकारी 27 अगस्त को सार्वजनिक की गई, जब Hibbert ऑपरेशन के बाद ठीक हो चुके थे. 

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AI ने आसान की सर्जरी

Rhys Hibbert Bedfordshire के रहने वाले 48 वर्षीय कस्टमर सवर्सिस मेनेजर और एंबुलेंस वोलंटरी हैं. दिसंबर 2024 तक वह पूरी तरह फिट थे और हर दिन लंच के समय करीब दो मील पैदल चलते थे. एक दिन इसी दौरान वह अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े और उन्हें दौरा पड़ा. जांच के बाद पता चला कि उनकी पिट्यूटरी ग्लैंड पर 11mm का एक नॉन-केंसिरियस ट्यूमर है. शुरुआत में डॉक्टरों ने ट्यूमर को वहीं छोड़ दिया, लेकिन बाद में यह ऑप्टिक नर्व पर दबाव डालने लगा. इससे Hibbert की नजर का निचला हिस्सा प्रभावित होने लगा और उन्हें वॉकिंग स्टिक का सहारा लेना पड़ा. 

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ऑपरेशन के दौरान AI ने लाइव वीडियो देखा

पिट्यूटरी ट्यूमर की सर्जरी डॉक्टर नाक के रास्ते करते हैं. इसके लिए एंडोस्कोप यानी पतली डंडी पर लगे कैमरे का इस्तेमाल होता है. पिट्यूटरी ग्रंथि कैरोटिड आर्टरी और ऑप्टिक नसों के बेहद करीब होती है, इसलिए सर्जरी काफी सावधानी से करनी पड़ती है. इस सर्जरी में AI ने पहले से लिए गए ब्रेन स्कैन की जगह ऑपरेशन का लाइव वीडियो देखा. इसने नसों और ब्लड वेसल्स को अलग-अलग रंगों से मार्क कर डॉक्टरों को सुरक्षित जगह पहचानने में मदद की.

AI खुद सर्जरी नहीं कर रहा था, बल्कि डिजिटल सहायक की तरह काम कर रहा था.  यह सिस्टम यूसीएल हॉक्स इंस्टीट्यूट में विकसित किया गया है, एनवीडिया के क्लारा आईजीएक्स प्लेटफॉर्म पर चलता है और पिट्यूटरी की सैकड़ों सर्जरी के चिन्हित किए गए डेटा से इसे प्रशिक्षित किया गया है.

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सर्जरी के बाद नजर में सुधार

ऑपरेशन के आठ हफ्ते बाद भी Rhys Hibbert की नजर में सुधार जारी है. उन्होंने बताया कि अब उन्हें आसपास की चीजें लगभग 360 डिग्री के पैनोरमिक व्यू की तरह दिखाई देती हैं. खास बात यह है कि ऑपरेशन के सिर्फ एक हफ्ते बाद ही वह बिना वॉकिंग स्टिक के चलने लगे थे. 

AI की पहली लाइव ब्रेन सर्जरी

पूरे ऑपरेशन के दौरान AI दूसरी स्क्रीन पर लाइव जानकारी देता रहा, लेकिन सर्जरी से जुड़े सभी अंतिम फैसले डॉक्टरों ने ही लिए. इस क्लिनिकल ट्रायल को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च और गूगल ने फंड किया है. UCL अब इस तकनीक पर बड़ा ट्रायल करने की तैयारी कर रहा है, जिससे भविष्य में AI ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को दूसरी राय देने वाले डिजिटल सहायक की तरह काम कर सके. 

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