Smartphone: भारत और पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों ने कई बार यह अनुभव किया है कि उनके स्मार्टफोन पर अचानक पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क का नाम दिखाई देने लगता है. कई बार फोन में रोमिंग जैसी सूचनाएं भी नजर आती हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या उनके फोन वास्तव में पाकिस्तान के सिग्नल पर चलने लगते हैं? इसका जवाब तकनीक से जुड़ा हुआ है और इसे समझना काफी दिलचस्प है.
सीमा क्षेत्रों में क्यों दिखाई देते हैं विदेशी नेटवर्क?
मोबाइल नेटवर्क रेडियो तरंगों के जरिए काम करता है. हर देश में हजारों मोबाइल टावर लगे होते हैं जो अपने आसपास के क्षेत्र में सिग्नल भेजते हैं. सामान्य तौर पर किसी देश के टावरों के सिग्नल उसी देश की सीमा के भीतर मजबूत रहते हैं लेकिन रेडियो तरंगें किसी दीवार या सीमा रेखा को नहीं पहचानतीं.
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे सीमावर्ती इलाकों में कई बार पाकिस्तान के मोबाइल टावरों के सिग्नल भारतीय क्षेत्र तक पहुंच जाते हैं. जब किसी जगह पर भारतीय नेटवर्क कमजोर हो और पाकिस्तानी टावर का सिग्नल अपेक्षाकृत मजबूत हो तो स्मार्टफोन उसे पहचान सकता है.
स्मार्टफोन कैसे चुनता है नेटवर्क?
हर स्मार्टफोन लगातार आसपास उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क की जांच करता रहता है. फोन का सॉफ्टवेयर उस नेटवर्क को प्राथमिकता देता है जिसका सिग्नल सबसे बेहतर हो और जो उपयोगकर्ता के सिम कार्ड के लिए उपलब्ध हो.
सीमा के पास होने पर फोन की स्क्रीन पर कभी-कभी पाकिस्तान के किसी मोबाइल ऑपरेटर का नाम दिखाई दे सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि कॉल और डेटा सेवाएं तुरंत उसी नेटवर्क पर चलने लगेंगी. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय रोमिंग और नेटवर्क समझौतों की भी जरूरत होती है.
क्या इससे कॉल और इंटरनेट इस्तेमाल हो सकता है?
यदि किसी भारतीय सिम में अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सक्रिय नहीं है तो केवल विदेशी नेटवर्क का नाम दिखाई देने से कॉल या इंटरनेट सेवा शुरू नहीं होती. अधिकांश मामलों में फोन केवल उस नेटवर्क को पहचानता है लेकिन उससे जुड़ नहीं पाता.
हालांकि जिन उपयोगकर्ताओं के सिम पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग एक्टिव होती है उनके फोन कुछ परिस्थितियों में विदेशी नेटवर्क से कनेक्ट हो सकते हैं. ऐसे मामलों में अतिरिक्त शुल्क भी लग सकता है.
सुरक्षा एजेंसियां क्यों रहती हैं सतर्क?
सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी नेटवर्क का सिग्नल पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण विषय होता है. इसी कारण दूरसंचार कंपनियां और सरकारी एजेंसियां सीमा के पास भारतीय नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त टावर और विशेष तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं.
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