Smart Meter: आज के समय में बिजली वितरण कंपनियां तेजी से स्मार्ट मीटर लगा रही हैं. इन मीटरों का उद्देश्य बिजली की खपत को रियल-टाइम में मॉनिटर करना, बिलिंग को अधिक सटीक बनाना और बिजली चोरी पर रोक लगाना है. लेकिन जैसे-जैसे ये डिवाइस इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है क्या स्मार्ट मीटर को हैक किया जा सकता है? आइए समझते हैं कि स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है और इसकी सुरक्षा कितनी मजबूत होती है.

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क्या होता है स्मार्ट मीटर?

स्मार्ट मीटर एक डिजिटल बिजली मीटर है जो उपभोक्ता की बिजली खपत को लगातार रिकॉर्ड करता है और यह डेटा सीधे बिजली कंपनी तक पहुंचाता है. पारंपरिक मीटर की तरह इसमें किसी कर्मचारी को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ती.

यह मीटर उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की जानकारी लगभग रियल-टाइम में उपलब्ध कराता है जिससे बिजली बचाने में भी मदद मिलती है.

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स्मार्ट मीटर किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है?

स्मार्ट मीटर कई आधुनिक तकनीकों के संयोजन से काम करता है. इसमें एक माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी और कम्युनिकेशन मॉड्यूल लगा होता है. डेटा ट्रांसमिशन के लिए इसमें GSM, 4G, RF (Radio Frequency), NB-IoT या Power Line Communication (PLC) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये तकनीकें मीटर को बिजली कंपनी के सर्वर से जोड़ती हैं और खपत संबंधी जानकारी अपने आप भेजती रहती हैं.

इसके अलावा स्मार्ट मीटर में रिमोट कनेक्ट और डिस्कनेक्ट जैसी सुविधाएं भी होती हैं जिससे बिजली कंपनी जरूरत पड़ने पर दूर बैठे ही कुछ कार्य कर सकती है.

क्या स्मार्ट मीटर को हैक किया जा सकता है?

तकनीकी रूप से देखा जाए तो इंटरनेट या नेटवर्क से जुड़ा कोई भी डिवाइस पूरी तरह हैकिंग से अछूता नहीं होता. इसलिए स्मार्ट मीटर को हैक करना सैद्धांतिक रूप से संभव है.

हालांकि, आधुनिक स्मार्ट मीटरों में एन्क्रिप्शन, सिक्योर ऑथेंटिकेशन और सुरक्षित फर्मवेयर जैसी कई सुरक्षा परतें मौजूद होती हैं. डेटा को एन्क्रिप्ट करके भेजा जाता है ताकि बीच में कोई व्यक्ति उसे पढ़ या बदल न सके.

यदि किसी सिस्टम में सुरक्षा खामी हो पुराना सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा हो या साइबर सुरक्षा नियमों का पालन न किया जाए, तब साइबर हमले का खतरा बढ़ सकता है.

सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं?

बिजली कंपनियां और मीटर निर्माता नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, सिक्योरिटी पैच और नेटवर्क मॉनिटरिंग का उपयोग करते हैं. कई स्मार्ट मीटरों में छेड़छाड़ का पता लगाने वाले सेंसर भी लगे होते हैं जो किसी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत भेज सकते हैं.

इसके अलावा महत्वपूर्ण डेटा को सुरक्षित सर्वरों में संग्रहित किया जाता है और केवल अधिकृत सिस्टम को ही उसकी पहुंच दी जाती है.

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