सोलर एनर्जी आज के समय में लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन के रूप में सामने आई है. बढ़ती बिजली बिल से छुटकारा पाने के लिए अब ज्यादातर लोग सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर रहे हैं. मार्केट में आज के समय में कई टाइप के सोलर पैनल मौजूद हैं जो लोगों की जरुरत के अनुसार बिजली बनाने का काम करते हैं. इसी कड़ी में अब बॉयो सोलर टेक्नोलॉजी काफी तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है. आइए जानते हैं कि क्या ये सच में सोलर पैनल को पहले के मुकाबले ज्यादा पावरफुल बना सकती है या नहीं.

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क्या है Bio Solar टेक्नोलॉजी?

Bio Solar टेक्नोलॉजी मूल रूप से Photosynthesis के प्रोसेस पर बेस्ड तकनीक है. बता दें कि पौधे सूर्य की रोशनी, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन तैयार करते हैं. इस नैचुरल प्रोसेस में सूर्य की एनर्जी को कैमिकल एनर्जी में बदला जाता है.

अब वैज्ञानिक इसी सिद्धांत को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर ऐसे सिस्टम तैयार करने पर काम कर रहे हैं जो जीवित पौधों की मदद से एनर्जी पैदा करे या फिर सोलर सिस्टम की ताकत को और बढ़ाने का काम करेगी. हालांकि, इसे अभी सोलर पैनल के ऑप्शन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी.

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कैसे बनेगी पौधों से बिजली

आपको बता दें कि जब पौधों के अंदर लाइट जाने के बाद जो प्रोसेस होता है उसमें इलेक्ट्रॉनों का ट्रांसफर भी शामिल है. अब इसी को ध्यान में रखते हुए इस नैचुरल प्रोसेस को बिजली बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाने पर काम किया जा रहा है.

वैज्ञानिक इस प्रोसेस को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं. कुछ एक्सपेरिमेंट में पौधों और दूसरे जैविक चीजों से निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों को इलेक्ट्रोड के जरिए इकट्ठा करने की कोशिश की जाती है. इसके साथ ही इसे Plant Microbial Fuel Cell जैसी टेक्नोलॉजी से भी कनेक्ट किया जाता है. अब अगर ये टेस्ट सफल हो जाता है तो पौधे सिर्फ आपको ऑक्सिजन देने का काम नहीं करेंगे बल्कि ये आपके लिए बिजली भी बनाने का काम करेंगे.

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कैसे बढ़ेगी सोलर पैनल की ताकत

दरअसल, Bio Solar टेक्नोलॉजी में वैज्ञानिक नैचुरल प्रोसेस और एनर्जी को एक साथ इस्तेमाल करने पर काम कर रहे हैं. बता दें कि पौधों में सूर्य की रौशनी को अच्छे से मैनेज करने की ताकत होती है. ऐसे में वैज्ञानिक इस नैचुरल प्रोसेस को समझकर ऐसे नए फोटोवोल्टिक सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं जो सूरज की रौशनी का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सके.

इसके बाद आने वाले समय में ऐसे हाइब्रिड सिस्टम तैयार हो सकेंगे जहां एक ही जगह से सोलर एनर्जी और जैविक प्रोसेस के जरिए एक्सट्रा एनर्जी मिल सकेगी. इससे लोग कम जगह पर भी ज्यादा बिजली बना सकेंगे.

टेस्टिंग फेज में है टेक्नोलॉजी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल बॉयो सोलर टेक्नोलॉजी अपने टेस्टिंग फेज में चल रही है. इसे कॉमर्शियल तरीके से इस्तेमाल करने से पहले वैज्ञानिक इसके बिजली तैयार करने की मात्रा, सिस्टम की लागत, लंबे समय तक स्टेबल परफॉर्मेंस और मेंटेनेंस जैसे चीजों पर काम कर रहे हैं.

इसलिए फिलहाल Bio Solar को नॉर्मल सोलर पैनलों के ऑप्शन के रूप में नहीं देखना चाहिए. हालांकि, अगर ये टेस्ट सफल होता है तो लोग कम जगह में भी ज्यादा बिजली तैयार कर सकेंगे.

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