अगर आपने गौर किया है तो कई लैपटॉप और स्मार्टफोन मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं. मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन से कुछ लोगों को लग सकता है कि किसी गैजेट को मिलिट्री यूज के लिए तैयार किया गया है और उसे मिलिट्री में यूज किया जाता है. क्या सच में ऐसा होता है या यह एक मार्केटिंग का एक तरीका है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किसी गैजेट के मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन का क्या मतलब होता है. 

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क्या होता है मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन?

मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन को MIL-STD-810 के लिए रेफर किया जाता है. यह एक अमेरिकी मिलिट्री का बनाया हुआ स्टैंडर्ड है, जिसके तहत वह अलग-अलग इक्विपमेंट को मुश्किल कंडीशन में टेस्ट करती है. इस स्टैंडर्ड में किसी गैजेट को टेंपरेचर, ह्यूमैडिटी, शॉक, वाइब्रेशन, डस्ट और अलग-अलग कंडीशन में टेस्ट किया जाता है. इन टेस्ट में यह देखा जाता है कि कोई इक्विपमेंट कितने कम और गर्म तापमान को झेल सकता है. इसी तरह उसे हाइट से गिराकर, धूल में रखकर आदि कई तरीकों से परखा जाता है.

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लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे गैजेट के लिए इसका क्या मतलब?

अगर स्मार्टफोन के कॉन्टेक्स्ट में देखें तो इस सर्टिफिकेशन का मतलब यह नहीं है कि इन्हें मिलिट्री के लिए टेस्ट किया गया है. इसका मतलब है कि वह गैजेट कई ऐसे लैब टेस्ट से गुजरा है, जो उसके टिपिकल यूज केस से अलग हैं. अधिकतर सर्टिफिकेशन ड्रॉप टेस्ट से रिलेटिड होते हैं. यानी उस गैजेट को अलग-अलग हाइट से गिराकर उसकी ड्यूरैबिलिटी को टेस्ट किया जाता है. इसके अलावा कई बार डस्ट रजिस्टेंस और टेंपरेचर टॉलरेंस के टेस्ट भी किए जाते हैं. लैपटॉप की बात करें तो इसे थर्मल स्टैबिलिटी और दूसरे ड्यूरैबिलिटी टेस्ट से गुजारा जाता है, जिसमें लैपटॉप के हिंज और दूसरे मूविंग पार्ट्स को वाइब्रेशन, रिपीटेड मोशन और ड्रॉप के समय टेस्ट किया जाता है. 

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