Digital India: 1 जुलाई 2015 को शुरू हुई डिजिटल इंडिया पहल को अब 11 साल पूरे हो चुके हैं, और इस दौरान आम आदमी की जिंदगी में जितना बदलाव आया है, उतना शायद ही किसी और सरकारी योजना ने किया हो. बैंक की लंबी लाइनों से लेकर टोल प्लाजा पर घंटों के इंतजार तक, हर जगह टेक्नोलॉजी ने काम आसान बना दिया है. इंडिपेंडेंस डे के मौके पर आइए जानते हैं डिजिटल इंडिया ने असल में हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को किन-किन तरीकों से बदल दिया है?

Continues below advertisement

ऑनलाइन बैंकिंग

पहले बैंक के हर छोटे काम के लिए ब्रांच जाना पड़ता था, लेकिन अब पैसे भेजना, बैलेंस चेक करना और एफ डी खुलवाना तक सब कुछ मोबाइल से हो जाता है. भारत आज दुनिया के करीब 50 प्रतिशत रियल टाइम डिजिटल पेमेंट अकेले हैंडल करता है, जो बताता है कि ऑनलाइन बैंकिंग कितनी गहराई तक लोगों की जिंदगी में उतर चुकी है.

DigiLocker

DigiLocker ने ज़रूरी दस्तावेजों को संभालने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट और दूसरे जरूरी पेपर्स फिजिकल कॉपी की जगह मोबाइल में ही सुरक्षित रहते हैं, और जरूरत पड़ने पर कहीं भी दिखाए जा सकते हैं.

Continues below advertisement

FASTag

टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें अब पुरानी बात हो चुकी हैं. FASTag की वजह से गाड़ियां बिना रुके टोल पार कर लेती हैं, जिससे न सिर्फ समय बचता है बल्कि ईंधन की खपत भी कम होती है.

यब भी पढ़ें: 15 अगस्त 1947 के बाद टेक्नोलॉजी में कितना बदल गया भारत? जानें पूरा सफर

ई-गवर्नेंस

सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और तेज बनाने में ई-गवर्नेंस की भूमिका सबसे बड़ी रही है. गांव गांव में बने कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए अब पासपोर्ट अप्लाई करने से लेकर इंश्योरेंस तक की सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं. देश भर में 4 लाख से ज्या ऐसे सेंटर्स अभी सक्रिय हैं, जो सरकारी कामों को गांव के दरवाजे तक ले आए हैं.

डिजिटल पेमेंट

UPI ने पैसों के लेन देन का पूरा तरीका ही बदल डाला है. फोनपे, गूगल पे और पेेटयम जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद से अब सब्जी वाले से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह कैशलेस पेमेंट आम बात हो चुकी है, जिससे नकदी पर निर्भरता काफी कम हो गई है.

ग्रामीण इंटरनेट

भारतनेट परियोजना के जरिए गांव गांव तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसी सेवाएं अब गांव के लोगों तक भी आसानी से पहुंच पा रही हैं. जून 2026 तक करीब 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को इस योजना के तहत सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है, और मार्च 2026 तक देश में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या 109.27 करोड़ के पार पहुंच चुकी है.

यब भी पढ़ें: 5G महंगा हुआ तो 4G की ओर लौटे ग्राहक! बजट फोन की बढ़ी मांग