What is Semiconductor: आज के दौर में स्मार्टफोन से लेकर कार, टीवी, मिसाइल, सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक लगभग हर आधुनिक तकनीक के पीछे एक ही चीज़ काम कर रही है और वह है सेमीकंडक्टर. बिना सेमीकंडक्टर के न तो इंटरनेट संभव है और न ही डिजिटल इंडिया का सपना. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि सेमीकंडक्टर आखिर होते क्या हैं भारत इनके उत्पादन पर इतना ज़ोर क्यों दे रहा है और यह देश की अर्थव्यवस्था व सुरक्षा के लिए क्यों अहम है.

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सेमीकंडक्टर क्या होते हैं?

सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता न तो पूरी तरह कंडक्टर होती है और न ही पूरी तरह इंसुलेटर. आसान भाषा में कहें तो ये जरूरत के अनुसार बिजली को रोक भी सकते हैं और पास भी कर सकते हैं. इसी खासियत के कारण इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक चिप्स बनाने में किया जाता है.

सिलिकॉन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सेमीकंडक्टर पदार्थ है. इसी से माइक्रोचिप, प्रोसेसर, मेमोरी चिप और सेंसर बनाए जाते हैं जो आज की डिजिटल दुनिया की रीढ़ माने जाते हैं.

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सेमीकंडक्टर क्यों कहलाते हैं टेक्नोलॉजी का दिल?

आपका स्मार्टफोन कितनी तेजी से काम करेगा, लैपटॉप कितना पावरफुल होगा या कार में लगे सेफ्टी सिस्टम कितने स्मार्ट होंगे इन सबका सीधा संबंध सेमीकंडक्टर से है. छोटे से छोटे चिप में करोड़ों ट्रांजिस्टर होते हैं जो सेकंड के अंश में फैसले लेते हैं.

5G नेटवर्क, AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा तकनीक इन सभी का विकास सेमीकंडक्टर के बिना संभव ही नहीं है. इसलिए इन्हें आधुनिक तकनीक का “दिल” कहा जाता है.

भारत को सेमीकंडक्टर की जरूरत क्यों पड़ी?

अब तक भारत सेमीकंडक्टर के मामले में दूसरे देशों पर काफी हद तक निर्भर रहा है. ज्यादातर चिप्स ताइवान, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका से आयात किए जाते हैं. कोरोना काल में जब सप्लाई चेन बाधित हुई, तब पूरी दुनिया ने चिप संकट का असर देखा.

भारत में भी मोबाइल, कार और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को भारी नुकसान हुआ. यहीं से सरकार को समझ आया कि अगर देश को आत्मनिर्भर बनना है तो सेमीकंडक्टर उत्पादन में खुद आगे आना होगा.

मेक इन इंडिया और सेमीकंडक्टर मिशन

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए India Semiconductor Mission की शुरुआत की. इसके तहत देश में फैब यूनिट्स, चिप डिजाइन और पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है.

सरकार कंपनियों को भारी सब्सिडी, टैक्स में छूट और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दे रही है ताकि वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करें. इसका मकसद सिर्फ आयात कम करना नहीं बल्कि भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाना है.

भारत में कहां बन रहे हैं सेमीकंडक्टर प्लांट?

पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा हुई है. गुजरात, तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर फैब और असेंबली यूनिट्स पर काम शुरू हो चुका है. देशी और विदेशी कंपनियां मिलकर यहां चिप निर्माण की नींव रख रही हैं. इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

सेमीकंडक्टर उत्पादन इतना मुश्किल क्यों है?

सेमीकंडक्टर बनाना किसी फैक्ट्री में सामान बनाने जैसा आसान नहीं है. इसके लिए अत्याधुनिक मशीनें, क्लीन रूम, शुद्ध पानी और बेहद सटीक तकनीक की जरूरत होती है. एक छोटी सी गलती पूरी चिप को बेकार बना सकती है.

इसके अलावा इसमें भारी निवेश और लंबे समय का धैर्य चाहिए. यही कारण है कि दुनिया के गिने-चुने देश ही इस क्षेत्र में आगे हैं. भारत अब धीरे-धीरे इस चुनौती को स्वीकार कर रहा है.

भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्यों है रणनीतिक रूप से जरूरी?

सेमीकंडक्टर सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है. रक्षा उपकरण, मिसाइल सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी और स्पेस टेक्नोलॉजी all इनका आधार चिप्स हैं. अगर किसी संकट के समय सप्लाई रुक जाए तो देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. घरेलू उत्पादन से भारत न सिर्फ सुरक्षित होगा, बल्कि तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर भी बनेगा.

युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए मौके

सेमीकंडक्टर सेक्टर के बढ़ने से भारत में रिसर्च, डिजाइन और इनोवेशन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा. इंजीनियरिंग छात्रों, चिप डिजाइनर्स और स्टार्टअप्स के लिए यह एक नया गोल्डन मौका है. AI, IoT और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को अब विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे इनोवेशन की रफ्तार और तेज होगी.

आने वाले समय में क्या बदलेगा?

आने वाले 10 वर्षों में सेमीकंडक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी जॉब्स में बड़ी उछाल देखने को मिलेगी. अगर योजनाएं सही तरीके से लागू हुईं तो भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि दूसरे देशों को भी चिप्स एक्सपोर्ट करने की स्थिति में आ सकता है.

भारत के भविष्य की चिप

सेमीकंडक्टर सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की नींव हैं. डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित राष्ट्र बनने का सपना इन्हीं चिप्स से होकर गुजरता है. भारत ने सही समय पर इस दिशा में कदम बढ़ाया है. अगर सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करें तो आने वाले समय में Made in India सेमीकंडक्टर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना सकते हैं.

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