Two-Step Verification: ऑनलाइन अकाउंट्स को सेफ रखने और हैकिंग से बचाने के लिए Two-Step Verification को इनेबल रखने की सलाह दी जाती है. आप भले ही कितना भी मजबूत पासवर्ड यूज कर लें, हैकिंग का खतरा पूरी तरह टलता नहीं है. हैकर को एक सफल कोशिश की जरूरत पड़ेगी और वह आपके अकाउंट तक पहुंच जाएगा. ऐसी स्थिति से बचाने में टू-स्टेप वेरिफिकेशन काम आ सकता है. आज हम आपको बताएंगे कि Two-Step Verification कैसे काम करता है और कैसे यह हैकिंग के खतरों से आपके अकाउंट को सिक्योर रखता है.

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क्या होता है Two-Step Verification?

यह एक सिक्योरिटी प्रोसेस है, जिसमें लोगों को अकाउंट की एक्सेस पाने के लिए दो अलग-अलग तरीके से खुद की पहचान को साबित करना होता है. इसमें पासवर्ड के अलावा भी एक और तरीके से वेरिफिकेशन मांगी जाती है. इंटरनेट के दौर में यह हालिया सालों में यूज होने लगा है, लेकिन यह तरीका बहुत पुराना है.

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कैसे काम करता है Two-Step Verification?

जैसा हमने ऊपर बताया कि इस प्रोसेस में यूजर को पासवर्ड के अलावा किसी एक और तरीके से खुद को वेरिफाई करना होता है. इसके लिए तीन अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई है. पहली कैटेगरी में नॉलेज फैक्टर को रखा गया है. यानी यूजर्स को साइन-इन करने के लिए पहली कार का नाम, मां का पहला नाम जैसे सिक्योरिटी क्वेश्चन्स के जवाब देने पड़ते हैं. दूसरी कैटेगरी में बायोमेट्रिक फैक्टर है. इसमें फिंगरप्रिंट, फेशियल रिकग्नेशन और कुछ मामलों में वॉइस का भी यूज किया जाता है. तीसरी कैटेगरी में पजेशन फैक्टर है. इस कैटेगरी में ऐसे आइटम को रेफर किया जाता है, जो आमतौर पर दूसरे लोगों के पास नहीं होते. थंब ड्राइव्स, सिक्योरिटी की और आईडी कार्ड आदि को इसमें रखा जा सकता है.

हैकिंग से कैसे बचाता है Two-Step Verification?

हैकिंग और स्कैम की ज्यादातर घटनाएं चुराए या कॉम्प्रोमाइज्ड पासवर्ड के कारण होती है. इनका यूज कर हैकर किसी भी अकाउंट में सेंध लगा सकते हैं. इसके अलावा कई बार एल्गोरिदम की मदद से भी पासवर्ड का अंदाजा लगा लिया जाता है. अगर आपके अकाउंट पर Two-Step Verification इनेबल है तो पासवर्ड पता होने के बाद भी कोई हैकर या स्कैमर अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पाएगा. यह प्रोसेसर सिर्फ पासवर्ड से साइन-इन नहीं करने देती. स्मार्टफोन सिक्योरिटी के लिए यह प्रोसेस खूब काम आती है. फोन खो जाने की सूरत में भी सिर्फ पासवर्ड से डेटा और ऐप्स को एक्सेस नहीं किया जा सकता. यही कारण है कि सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और कंपनियां Two-Step Verification को इनेबल रखने की सलाह देती हैं.

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