कुछ साल पहले नया फोन खरीदने के बाद उसे सेटअप करने के लिए कई ऐप्स डाउनलोड करने की जरूरत होती थी. फोन लेते ही कई लोग सबसे पहले फोटो एडिटिंग और रैम बूस्टिंग के लिए ऐप्स डाउनलोड करते थे. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उस समय फोन में बिल्ट-इन ऐप्स पावरफुल नहीं होती थी, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं. अब फोन में कई बिल्ट-इन टूल्स आने लगे हैं, जिस कारण कई ऐप्स की जरूरत बिल्कुल खत्म हो गई है. आज हम जानेंगे कि अब फोन में किन ऐप्स को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है.
फोटो एडिटिंग ऐप्स
अगर आपको नॉर्मल यूज के लिए फोटो एडिटिंग करनी है तो अलग से थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. अब एआई आने के बाद गूगल फोटोज में ही कई एडिटिंग ऑप्शन मिल जाते हैं. अब तो ऐसे ऑप्शन भी फोन में मिल रहे हैं, जो फोटो से अनचाहे ऑब्जेक्ट को चुटकियों में हटा देते हैं. इसी तरह सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियां भी इमेज एडिटिंग के कई टूल्स दे रही हैं.
वीडियो प्लेयर
कुछ साल पहले तक लगभग हर मोबाइल में VLC, MX प्लेयर या कोई दूसरा वीडियो प्लेयर मिल जाता था. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि पहले कुछ फाइल फॉर्मेट मोबाइल के इन-बिल्ट वीडियो प्लेयर में नहीं चलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब एंड्रॉयड लगभग हर वीडियो फॉर्मेट को सपोर्ट करता है. इसी तरह गूगल फोटोज में भी हर फॉर्मेट चल जाता है.
QR और डॉक्यूमेंट स्कैनर ऐप
रेस्टोरेंट से लेकर मेट्रो स्टेशन तक, आजकल हर जगह QR कोड दिख जाते हैं, लेकिन अब इन्हें स्कैन करने के लिए आपको अलग से ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. एंड्रॉयड फोन का कैमरा ही अब यह काम कर सकता है. अगर आपके फोन का कैमरा कोड स्कैन नहीं कर रहा है तो आप कैमरा सेटिंग में जाकर QR कोड स्कैनिंग फीचर को ऑन कर सकते हैं.
रैम बूस्टर ऐप्स
कुछ साल पहले तक हर स्मार्टफोन यूजर के फोन में क्लीनर या बूस्टर ऐप्स होती थी. ये एक टैप करते ही फोन से जंक फाइल्स क्लियर करने से लेकर फोन की स्पीड बढ़ाने तक का दावा करती थी. अब इन ऐप्स की जरूरत नहीं है. एंड्रॉयड अपने लेवल पर मेमोरी को मैनेज कर लेता है. भले ही आपके फोन में कितनी भी ऐप्स क्यों न हो, आपके फोन का सिस्टम बैकग्राउंड में सब कुछ ऑप्टिमाइज कर लेता है.
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