Data Rollover: हाल ही में संसद में टेलीकॉम नियमों को लेकर हुई चर्चा में एक अहम सवाल सामने आया क्या यूजर्स का बचा हुआ मोबाइल डेटा यूं ही खत्म हो जाना सही है? अभी स्थिति यह है कि जो डेटा आप इस्तेमाल नहीं करते, वह दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है. अब लोग टेलीकॉम कंपनियों से मांग कर रहे हैं कि बचा हुआ डेटा अगले दिन के लिए बचा लिया जाए. यह सिर्फ सुविधा का मामला नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकार और पारदर्शिता से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है.

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रोज क्यों खत्म हो जाता है अनयूज्ड डेटा?

भारत में ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां रोजाना डेटा लिमिट वाले प्रीपेड प्लान देती हैं जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB प्रति दिन. ये प्लान सस्ते और लोकप्रिय जरूर हैं लेकिन इनकी एक बड़ी कमी है. अगर आप रोज का पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाते तो बचा हुआ हिस्सा अपने आप खत्म हो जाता है.

मान लीजिए आपके पास 2GB का प्लान है और आपने सिर्फ 1.5GB ही इस्तेमाल किया तो बचा हुआ 0.5GB रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाएगा. न तो यह आगे बढ़ेगा और न ही इसके बदले कोई फायदा मिलेगा. इसी मुद्दे को लेकर संसद में आवाज उठाई गई और डेटा रोलओवर की मांग सामने आई.

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यूजर्स क्या चाहते हैं?

आज के समय में यूजर्स चाहते हैं कि उनके पैसे का पूरा मूल्य मिले. डेटा रोलओवर को लेकर कुछ अहम मांगें सामने आई हैं.

बचा हुआ डेटा आगे जोड़ा जाए

सबसे बड़ी मांग यही है कि जो डेटा यूज नहीं हुआ, वह अगले दिन के डेटा में जुड़ जाए. इससे यूजर्स को ज्यादा लचीलापन मिलेगा और उनका डेटा बेकार नहीं जाएगा. कुछ पोस्टपेड प्लान में यह सुविधा पहले से है, लेकिन प्रीपेड यूजर्स अभी इससे वंचित हैं.

इस्तेमाल के हिसाब से प्लान की कीमत

अगर कोई यूजर लगातार अपना पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर रहा तो उसके अगले रिचार्ज की कीमत उसी हिसाब से कम होनी चाहिए. यानी यूजर्स को उनकी जरूरत के अनुसार पर्सनलाइज्ड प्लान या छूट मिले.

डेटा शेयर और ट्रांसफर की सुविधा

एक और दिलचस्प सुझाव यह है कि बचा हुआ डेटा दूसरों को ट्रांसफर करने की सुविधा दी जाए. जैसे परिवार में अगर किसी के पास डेटा ज्यादा बच रहा है और किसी का खत्म हो रहा है तो वह आसानी से शेयर किया जा सके.

यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

अगर ये सुझाव लागू होते हैं तो मोबाइल प्लान पहले से ज्यादा यूजर-फ्रेंडली हो जाएंगे. इससे न सिर्फ डेटा की बर्बादी कम होगी बल्कि लोगों को अपने खर्च का सही फायदा भी मिलेगा. साथ ही यह डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी मजबूत करेगा जहां हर यूजर को बेहतर और निष्पक्ष सेवाएं मिलें.

कंपनियों का रुख क्या है?

फिलहाल टेलीकॉम कंपनियों की ओर से कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. लेकिन इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेजी पकड़ रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में नई नीतियां सामने आ सकती हैं.

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