Elon Musk Starlink: एलन मस्क की कंपनी SpaceX अब अपने Starlink सैटेलाइट नेटवर्क में अहम बदलाव करने जा रही है. कंपनी ने फैसला किया है कि वह पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद अपने सैटेलाइट्स की ऊंचाई कम करेगी ताकि अंतरिक्ष में टकराव के खतरे को घटाया जा सके. यह प्रक्रिया साल 2026 के दौरान चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी.

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Starlink सैटेलाइट्स की ऊंचाई क्यों घटाई जा रही है?

SpaceX के Starlink इंजीनियरिंग विभाग के वाइस प्रेसिडेंट माइकल निकोल्स के अनुसार, फिलहाल Starlink के कई सैटेलाइट लगभग 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे हैं. इन्हें धीरे-धीरे नीचे लाकर करीब 480 किलोमीटर की कक्षा में शिफ्ट किया जाएगा. उनका कहना है कि इससे लो अर्थ ऑर्बिट में सुरक्षा बेहतर होगी और सैटेलाइट्स के आपस में टकराने की आशंका कम होगी.

हाल की घटना ने बढ़ाई चिंता

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दिसंबर में Starlink के एक सैटेलाइट में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई थी. उस घटना में सैटेलाइट से संपर्क टूट गया और थोड़ी मात्रा में अंतरिक्ष मलबा भी पैदा हुआ. बताया गया कि यह सैटेलाइट करीब 418 किलोमीटर की ऊंचाई पर था और अचानक उसकी ऊंचाई कुछ किलोमीटर कम हो गई जिससे यह संकेत मिला कि अंदर कोई गंभीर खराबी या विस्फोट हुआ हो सकता है.

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कम ऊंचाई पर क्यों ज्यादा सुरक्षित है कक्षा?

माइकल निकोल्स का कहना है कि 500 किलोमीटर से नीचे की कक्षा में सैटेलाइट्स और मलबे की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है. इसका मतलब यह है कि वहां टकराव की कुल संभावना भी घट जाती है. इसके अलावा, अगर किसी सैटेलाइट में खराबी आती है तो कम ऊंचाई पर होने की वजह से वह तेजी से वायुमंडल में प्रवेश कर जल सकता है जिससे लंबे समय तक खतरनाक मलबा बने रहने का जोखिम भी कम हो जाता है.

अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ एक बड़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी की कक्षा में सैटेलाइट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है. इंटरनेट, संचार और पृथ्वी की निगरानी के लिए कई देश और निजी कंपनियां हजारों सैटेलाइट लॉन्च कर रही हैं. इस दौड़ में SpaceX सबसे आगे है और Starlink के जरिए वह दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट ऑपरेटर बन चुका है जिसके करीब 10,000 सैटेलाइट सक्रिय हैं.

भविष्य की ओर इशारा करता यह फैसला

Starlink सैटेलाइट्स की ऊंचाई घटाने का यह कदम साफ तौर पर दिखाता है कि SpaceX अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर गंभीर है. जैसे-जैसे अंतरिक्ष में ट्रैफिक बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऐसे फैसले आने वाले समय में और भी अहम होते जाएंगे. SpaceX का यह कदम बाकी कंपनियों के लिए भी एक संकेत हो सकता है कि टेक्नोलॉजी के साथ-साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है.

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