Solar Panel Thermal Management: पिछले कुछ वर्षों से सोलर एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ा है. अगर भारत की बात करें तो अब गांव से लेकर शहरों तक हर जगह सोलर पैनल इस्तेमाल होने लगे हैं. सोलर एनर्जी न सिर्फ क्लीन एनर्जी सोर्स है बल्कि यह बिजली बिल की बचत भी करती है. यही कारण है कि लोग अब तेजी से अपने घरों पर सोलर पैनल लगाने लगे हैं. दिन के समय सोलर सनलाइट को बिजली में कन्वर्ट कर देते हैं. कई लोगों को लगता है कि ज्यादा गर्मी और धूप होने पर सोलर पैनल ज्यादा बिजली बनाते हैं. असल में ऐसा नहीं होता. यह बात सच है कि सीधी धूप से पैनल ज्यादा बिजली जनरेट करते हैं, लेकिन ज्यादा गर्मी होने पर पैनल की एफिशिएंसी पर असर पड़ता है. यानी टेंपरेचर बढ़ने के साथ-साथ पैनल बिजली बनाना कम करते जाएंगे. 

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किस टेंपरेचर पर बेस्ट परफॉर्मेंस देते हैं सोलर पैनल?

25 डिग्री टेंपरेचर तक सोलर पैनल बेस्ट परफॉर्मेंस देते हैं. जब टेंपरेचर इससे ऊपर बढ़ता जाएगा तो हर एक डिग्री सेल्सियस के साथ एफिशिएंसी में 0.3-0.5 प्रतिशत तक की गिरावट आती जाएगी. यानी 35 डिग्री सेल्सियस में सोलर पैनल 25 डिग्री के मुकाबले 3-5 प्रतिशत तक कम बिजली जनरेट करेंगे. भारत के हिसाब से अगर गर्मी के मौसम को देखा जाए तो मई-जून में टेंपरेचर 45 डिग्री से पार पहुंच जाता है और सोलर पैनल पर यह करीब 60 डिग्री तक पहुंच जाता है. इससे पावर आउटपुट पर सीधा असर पड़ता है.

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ज्यादा गर्मी से ये भी नुकसान

गर्मी के मौसम में ज्यादा टेंपरेचर से न सिर्फ पावर आउटपुट कम होती है बल्कि दूसरी चीजों पर भी असर पड़ता है. ज्यादा गर्मी से मैटेरियल डिग्रेडेशन तेज हो जाता है. यानी पैनल बनाने में यूज हुआ सामान जल्दी खराब हो सकता है. इसके अलावा सोलर सेल्स पर भी स्ट्रेस बढ़ता है और पूरे मॉड्यूल का लाइफ स्पैन कम हो जाता है.

क्या है इससे बचाव का तरीका?

क्लाइमेट चेंज को देखते हुए गर्मी कम होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे, बल्कि हर साल टेंपरेचर में इजाफा हो रहा है. इसे देखते हुए सोलर पैनल को ज्यादा टेंपरेचर से बचाने के लिए कुछ तरीके इस्तेमाल होते आए हैं. इनमें पैनल के आसपास एयर फ्लो के लिए पर्याप्त स्पेस छोड़ने और मॉड्यूल मैटेरियल का सावधानी से चुनाव करना आदि शामिल हैं. हालांकि, इनकी एक लिमिट है और अब चूंकि पावर डेन्सिटी लगातार बढ़ रही है तो नए तरीकों पर काम किया जा रहा है. माना जा रहा है कि ये तरीके सोलर पैनल के थर्मल मैनेजमेंट में कारगर साबित हो सकते हैं.

इन नए तरीकों पर चल रहा काम

सोलर पैनल पूरी गर्मी में भी फुल एफिशिएंसी के साथ काम करते रहे, इसके लिए कंपनियां और रिसर्चर नए-नए रास्ते ढूंढ रहे हैं और कुछ ऑप्शन अवेलेबल भी हुए हैं. इनमें एडवांस्ड इनकैप्सूलेशन मैटेरियल आदि शामिल हैं, जो हीट ट्रांसफर को इंप्रूव करता है, जिससे थर्मल मैनेजमेंट में मदद मिलती है. इसी तरह हाई-कंडक्टिविटी बैक-शीट पर भी काम चल रहा है. ये हीट को एक समान फैलने में मदद करती है, जिससे पैनल पर हॉटस्पॉट बनने जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है. इसके अलावा पैनल पर टेंपरेचर को कम रखने के लिए रेडिएटिव कूलिंग कोटिंग और फेज-चेंज मैटेरियल भी काम हो रहा है. टेस्ट के दौरान इन्होंने शानदार नतीजे दिखाए हैं.

इसलिए भी है नए तरीकों की जरूरत

सोलर पैनल के सरफेस पर टेंपरेचर कम रखने की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि TOPCon और HJT जैसी नेक्स्ट-जनरेशन सेल्स की एफिशिएंसी ज्यादा होती है. अगर टेंपरेचर को कंट्रोल में रखा जाए तो ये टेक्नोलॉजी शानदार एफिशिएंसी के साथ पावर आउटपुट दे सकती हैं. इस लिहाज से देखा जाए तो सोलर एफिशिएंसी का फ्यूचर न सिर्फ एडवांस्ड सेल आर्किटेक्चर पर डिपेंड करेगा बल्कि इसके लिए एक बेहद कारगर थर्मल डिजाइन की भी जरूरत है जो एनर्जी लॉस को कम करते हुए लगातार हाई एनर्जी आउटपुट दे सके.

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