Solar Panel Technology: मधुमक्खी के छत्ते से आइडिया लेकर वैज्ञानिक सोलर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति लाने की तैयारी कर रहे हैं. वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों के छत्ते की तरह स्ट्रक्चर वाले नए सोलर पैनल तैयार किए हैं, जो फ्लैट डिजाइन वाले पैनल की तुलना में ज्यादा सनलाइट कैप्चर कर सकते हैं. ज्यादा सनलाइट कैप्चर होने का मतलब है कि पैनल ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे. यह नया डिजाइन सोलर पैनल की सबसे बड़ी लिमिटेशन को दूर कर सकता है.

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नए डिजाइन का क्या फायदा होगा?

अभी सोलर पैनल का सरफेस एकदम फ्लैट होता है और ये तभी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाते हैं, जब सूरज बिल्कुल इनके ऊपर होता है. जैसे ही सूरज का एंगल थोड़ा बदलता है, इन पर पड़ने वाली ज्यादातर सनलाइट एनर्जी में कन्वर्ट होने की बजाय रिफ्लेक्ट हो जाती है. नए डिजाइन वाले पैनल में यह झंझट नहीं रहेगा. ये सूरज के बिल्कुल ऊपर न होने पर भी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाएंगे. अगर यह डिजाइन लैब से निकलकर मार्केट में आता है तो सोलर इंस्टॉलेशन की पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी. नए स्ट्रक्चर वाले पैनल को कर्व्ड बिल्डिंग्स के साथ-साथ वाहनों पर भी इंस्टॉल किया जा सकेगा.

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कैसे काम करेंगे नए पैनल?

वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों से इंस्पिरेशन लेते हुए एक 3D कॉन्केव सोलर पैनल बनाया है, जिसकी स्ट्रक्चर एक हनीकॉम्ब जैसी है. इसका फायदा यह होगा कि पैनल पर आने वाली लाइट सरफेस पर पड़ते ही रिफ्लेक्ट होने की बजाय पैनल की एंगल्ड वॉल्स के बीच ही बाउंस होती रहेगी. जब यह एक वॉल से टकराकर दूसरी पर आएगी तो उसे भी इसे सनलाइट से इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करने का मौका मिलेगा. लैब टेस्ट के दौरान नए डिजाइन वाले पैनल ने फ्लैट पैनल की तुलना में 142.3 प्रतिशत ज्यादा आउटपुट दिया है. इसके अलावा जब सूरज पैनल के बिल्कुल ऊपर आ जाएगा तो इनकी पावर जनरेशन कैपेबिलिटी लगभग 37 प्रतिशत और बढ़ जाएगी. 

फ्लेक्सिबल भी होंगे नए पैनल

मौजूदा पैनल काफी रिजिड होते हैं और इन्हें मोड़ा नहीं जा सकता. इस कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने नए पैनल में पॉलीमर मेटामैटेरियल का इस्तेमाल किया है, जिससे इनमें फ्लेक्सिबिलिटी आई है. इस फ्लेक्सिबिलिटी के कारण इन्हें कर्व्ड बिल्डिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एयरोस्पेस इक्विपमेंट समेत उन जगहों पर भी इंस्टॉल किया जा सकेगा, जहां फ्लैट पैनल नहीं लगाए जा सकते. हालांकि, अभी ये पैनल कॉन्सेप्ट के तौर पर ही डेवलप किए जा रहे हैं. मार्केट में पहुंचने से पहले इनकी बड़े लेवल पर टेस्टिंग जरूरी होगी. उसके नतीजों से यह साफ होगा कि ये पैनल कॉन्सेप्ट से निकल रियल वर्ल्ड में यूज हो पाएंगे या नहीं.

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