Solar Energy System Risks: बिजली बिल की बचत और पावर कट आदि की टेंशन से मुक्ति के लिए लोग तेजी से सोलर एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं. जब कोई ट्रेन्ड प्रोफेशनल सोलर एनर्जी सिस्टम को इंस्टॉल और मैंटेन करता है तो यह बहुत हद तक सुरक्षित हो जाता है, लेकिन कई बार टेक्नीकल या दूसरे कारणों से यह सिस्टम काफी रिस्की भी बन जाता है. आज हम जानेंगे कि सोलर सिस्टम के रिस्क क्या हैं और कैसे इन खतरों को कम किया जा सकता है.
क्या हैं Solar Energy System के रिस्क?
करंट लगने का खतरा- सारे सोलर पैनल DC इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करते हैं. इसका मतलब है कि पावर ग्रिड से सप्लाई बंद होने के बाद भी DC केबल, कनेक्टर्स और पैनल लाइव रहते हैं. ऐसे में तार खुला रहने या डैमेज होने और कनेक्टर लूज होने पर DC सर्किट के संपर्क में आना जानलेवा हो सकता है.
DC Arc Fault- जब डैमेज्ड या लूज इलेक्ट्रिक कनेक्शन के बीच इलेक्ट्रिसिटी जंप होती है तो इसे DC Arc Fault कहा जाता है. कनेक्टर और इलेक्ट्रिक कनेक्शन लूज होने की स्थिति में यह दिक्कत ज्यादा आती है. इस कारण हीट जनरेट होती है, जो इंसुलेशन को मेल्ट करने के साथ-साथ आसपास मौजूदा मैटेरियल को जला सकती है, जिससे आग लगने का खतरा रहता है.
लाइटनिंग- सोलर पैनल बिल्डिंग के सबसे ऊपर लगते हैं. अगर इनमें प्रॉपर अर्थिंग और सर्ज प्रोटेक्शन यूज न की जाए तो ये सिस्टम से कनेक्टेड इन्वर्टर, केबल और इलेक्ट्रिक अप्लायंसेस को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
मौसम से जुड़े रिस्क- सोलर पैनल को बारिश, उमस और गर्मी जैसे कई तरह के मौसम का सामना करना पड़ता है. इसलिए सिस्टम को हर प्रकार के मौसम से बचाने के लिए तैयार करना जरूरी है. अगर कनेक्टर को पूरी तरह सील न किया जाए तो इसमें नमी जा सकती है, जो करंट या शॉर्ट सर्किट का कारण बन जाएगी. इसी तरह उमस और बारिश के कारण माउंटिंग स्ट्रक्चर और केबल ज्वॉइंट में जंग लगने का खतरा रहता है.
कैसे कम किया जा सकता है जोखिम?
- जोखिम कम करने का पहला और आसान तरीका यह है कि हमेशा प्रोफेशनल सोलर टेक्निशियन से सिस्टम को इंस्टॉल और मैंटेन करवाएं.
- सही टूल और इक्विपमेंट का यूज रिस्क कम कर सकता है.
- सिस्टम इंस्टॉल करने से पहले साइट को इंस्पेक्शन जरूरी है. इसमें छत की मजबूती, जरूरी स्पेस आदि चीजों का पता लगाया जा सकता है.
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