Smartphone Prices in India: नया फोन खरीदने वाले ग्राहकों को जोर का झटका लग रहा है. पिछले साल जहां मोबाइल फोन की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, वहीं इस साल के पहले पांच महीनों में दामों में लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा चुकी है. मई तक हर महीने फोन की कीमतें बढ़ती आई हैं और फिलहाल राहत के संकेत भी नजर नहीं आ रहे. एंट्री-लेवल और बेस-लेवल के स्मार्टफोन के दामों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. मेमोरी चिप्स की कमी के कारण बढ़ती लागत इस प्राइस हाइक का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है.

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इस साल बदल गई स्मार्टफोन मार्केट की तस्वीर

TechArc की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मोबाइल के दाम स्थिर रहे. आमतौर पर पहली तिमाही में लॉन्च हुए फोन की कीमतें सितंबर तक करीब 5 प्रतिशत तक कम हो जाती थीं. 2025 में 47 मॉडल्स के दाम बढ़े और 44 के कम हुए थे. इस साल यह ट्रेंड ही बदल गया है. इस साल फोन महंगे ज्यादा हो रहे हैं, जबकि सस्ते होने वालों की संख्या कम है. 2026 में 79 मॉडल महंगे हुए हैं, जबकि केवल 18 की कीमतें कम हुई हैं. इसके अलावा इस साल जनवरी से लेकर मई तक हर महीने फोन के दाम बढ़े हैं और 5 महीनों में ही कीमतों में 7.9 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ है. 

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फोन महंगे होने का कारण क्या है? एआई आने के बाद डेटा सेंटर की जरूरतें बढ़ी हैं और अब एआई कंपनियां इन पर अरबों का निवेश कर रही हैं. डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में चिप की जरूरत पड़ती है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए चिप निर्माता कंपनियों ने कंज्यूमर मार्केट यानी लैपटॉप और स्मार्टफोन आदि में यूज होने वाली चिप्स का प्रोडक्शन कम कर दिया. अब उनका पूरा फोकस एआई डेटा सेंटर के लिए चिप बनाने पर है. इस कारण स्मार्टफोन आदि डिवाइसेस के लिए चिप की कमी हो गई और इनकी कीमतें आसमान छूने लगीं. इससे मोबाइल कंपनियों की लागत बढ़ी और उसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है.

लगभग सभी कंपनियों पर पड़ा असर

मेमोरी चिप्स की कमी का असर लगभग सभी कंपनियों पर पड़ा है. Ai+ ने अपने फोन की कीमतें 31.6 प्रतिशत, रेडमी ने लगभग 27 प्रतिशत, CMF ने 24.3 प्रतिशत, Infinix ने लगभग 20 प्रतिशत और पोको ने लगभग 16.4 प्रतिशत बढ़ाई हैं. इसी तरह सैमसंग जैसी कंपनियों ने भी अपने कई मॉडल्स महंगे किए हैं. इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर सस्ते मॉडल्स पर पड़ रहा है. 

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