Smartphone Addiction: जब भी स्मार्टफोन एडिक्शन या स्क्रीन टाइम की बात होती है तो ज्यादातर मौकों पर यह चर्चा बच्चों को लेकर ही होती है. लेकिन अब एक स्टडी ने बताया है कि बच्चों के साथ-साथ उनके पैरेंट्स की आदतें भी बहुत मायने रखती हैं. जो पैरेंट्स पूरे दिन फोन पर लगे रहते हैं, उनका अपने बच्चों के साथ इमोशनल बॉन्ड कमजोर हो जाता है. इससे बच्चों के विकास और दिमाग पर असर पड़ता है. स्टडी में शामिल 12-17 साल के टीनएजर्स में अधिकतर ने कहा कि जब उनके पैरेंट्स फोन में घुसे होते हैं, तब उन्हें ऐसा फील होता है कि उन्हें इग्नोर या साइडलाइन किया जा रहा है.
पैरेंट्स के फोन यूज करने पर बच्चों पर क्या असर?
Frontiers in Psychology जर्नल में पब्लिश हुई इस स्टडी के रिसर्चर ने पाया है कि जब पैरेंट्स या केयरगिवर बहुत अधिक समय तक फोन यूज करते हैं तो इससे इनसिक्योर अटैचमेंट हो सकती है. इनसिक्योर अटैचमेंट एक ऐसा पैटर्न होता है, जो बच्चों को बैचेन कर देता है और वो आगे चलकर जीवन में रिश्ते बनाते समय बहुत कॉन्फिडेंट नहीं हो सकते. अगर इस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये चीजें जवानी तक बच्चे पर असर डाल सकती हैं.
क्या रिश्तों को कमजोर कर रहे हैं डिजिटल डिवाइसेस?
यह स्टडी ऐसे समय सामने आई है, जब "टेक्नोफेरेंस" पर रिसर्च लगातार बढ़ती जा रही है. टेक्नोफेरेंस को आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि डिजिटल डिवाइस असल रिश्तों को कमजोर कर रहे हैं. इसके पहले की स्टडीज में रोमांटिक रिश्तों पर डिजिटल डिवाइस का असर समझा गया था, लेकिन ताजा रिसर्च दिखा रही है कि यह बच्चों और पैरेंट्स के रिश्तों पर भी असर डाल रहा है. यह भी अजीब बात है कि अब तक बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर ही बहस होती आ रही थी, लेकिन नई स्टडी ने पूरी कहानी को ही बदल दिया है.
फिजिकली प्रेजेंट, लेकिन दिमाग कहीं और
रिसर्चर का कहना है कि डिजिटल डिवाइस को लेकर पैरेंट्स फिजिकली प्रेजेंट होते हैं, लेकिन उनका ध्यान और दिमाग कहीं और होता है. 2024 में अमेरिका में हुए एक सर्वे में इस बात पर मुहर लगी थी. सर्वे में शामिल अधिकतर बच्चों ने कहा कि उनसे बातचीत के दौरान पैरेंट्स का ध्यान फोन में ज्यादा होता है, जबकि कुछ ही पैरेंट्स ने इस बात को स्वीकार किया था.
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