6G: जहां एक तरफ 5जी नेटवर्क का विस्तार हो रहा है. वहीं, दूसरी तरफ, वैज्ञानिकों ने 5जी को पीछे छोड़ते हुए 6जी की ओर एक बड़ा कदम रखा है. दरअसल, स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे एडवांस वायरलेस टेस्टिंग प्लेटफॉर्म में से एक को तैयार किया है जिसमें 256 डिजिटल एंटीना को एक साथ Real-Time में सफलतापूर्वक चलाया गया. ये खोज आने वाले समय में 6G नेटवर्क को तेज और ज्यादा एडवांस बनाने का काम करेगी.

Continues below advertisement

कैसे काम करता है LuLIS सिस्टम?

रिपोर्ट के अनुसार, ये सिस्टम कुल 16 प्रोग्रामेबल पैनलों से मिलकर तैयार हुआ है और हर एक पैनल में 16 एंटीना लगाए गए हैं. इस तरह से पूरे सिस्टम में कुल 256 एंटीना मौजूद हैं. इसमें AMD के स्पेशल हार्डवेयर का इस्तेमाल किया गया है और इसका डिजाइन मॉड्यूलर रखा गया है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में अगर जरुरत पड़ती है तो इसमें नए पैनल और एक्सट्रा हार्डवेयर को आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा.

कैसे तैयार हुआ ये सिस्टम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लुंड यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग डिपॉर्टमेंट (LTH) की टीम ने Lund University Large Intelligent Surface (LuLIS) नाम से एक सिस्टम तैयार किया है. इस सिस्टम का मकसद नई वायरलेस टेक्नोलॉजी को असली समय में परखना कि आखिर वो किस तरह से काम कर रहा है.

Continues below advertisement

रिसर्च टीम के अनुसार, 256 एंटीना अलग-अलग जगहों पर होने के बावजूद एक नेटवर्क की तरह काम करने में सफल रहे. इस टेक्नोलॉजी की सबसे खास बात ये है कि इसकी मदद से डेटा ट्रांसमिशन और सिग्नल कंट्रोल एक साथ रियल-टाइम में हो सका जिससे ये साबित होता है कि ये टेक्नोलॉजी सिर्फ कंप्यूटर सिमुलेशन तक सीमित नहीं है बल्कि असल दुनिया में भी काफी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है.

क्यों है इस टेक्नोलॉजी की जरुरत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनियाभर में इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगातर तेजी से बढ़ रही है. पूरी दुनिया आज डिजिटल रुप से एक्टिव है. ऐसे में आने वाले समय में सेल्फ-ड्राइविंग कारें, स्मार्ट फैक्ट्री, स्मार्ट सिटी और कनेक्टेड पब्लिक सर्विसेज जैसी टेक्नोलॉजी को ज्यादा तेज और स्टेबल नेटवर्क की जरुरत पड़ेगी. इसी जरुरत को पूरा करने में ये नई टेक्नोलॉजी काफी मदद करेगी.

हालांकि इसके सामने भी एक बड़ी चुनौती है जो लिमिटेड रेडियो स्पेक्ट्रम है. एक ही फ्रीक्वेंसी पर लगातार बढ़ते डिवाइस नेटवर्क पर ज्यादा लोड डाल रहे हैं. ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करने में जुटे हैं जो कम स्पेक्ट्रम को भी ज्यादा स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल कर सके.

यह भी पढ़ें:

काम का तनाव होगा आधा! प्रोफेशनल्स के लिए बेस्ट हैं ये Gadgets, फटाफट चेक करें लिस्ट