चाइनीज स्मार्टफोन मेकर रियलमी अब अलग कंपनी नहीं रहेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब रियलमी फिर से ओप्पो के साथ जुड़ रही है और उसके सब-ब्रांड के तौर पर काम करेगी. गौरतलब है रियलमी ओप्पो से ही निकली थी और अब सात साल बाद फिर अपनी पुरानी कंपनी के साथ जुड़ रही है. यह इंटीग्रेशन होने के बाद भी रियलमी अपने नाम से बाजार में फोन लॉन्च करती रहेगी, जिससे यूजर्स के लिए बहुत कुछ नहीं बदलेगा. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है.

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ओप्पो के साथ वापस क्यों जा रही है रियलमी?

रियलमी की शुरुआत मई, 2018 में ही हुई थी. रियलमी के फाउंडर स्काई ली पहले ओप्पो में ही काम करते थे. जुलाई, 2018 में उन्होंने रियलमी को अलग कंपनी बनाने के लिए रिजाइन कर दिया था. इसके बाद से रियलमी स्वतंत्र तौर पर काम कर रही थी. अब लगातार बढ़ते खर्चे बचाने और संसाधनों को एक साथ लाने के लिए रियलमी वापस ओप्पो के साथ जुड़ रही है. रियलमी के जुड़ने पर वनप्लस समेत ओप्पो के दो सब-ब्रांड हो जाएंगे. गौरतलब है कि रियलमी, ओप्पो और वीवो सभी चीनी कंज्यूमर हार्डवेयर दिग्गज BBK इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनियां हैं.

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रियलमी के फाउंडर देखेंगे इंटीग्रेशन का पूरा काम

रियलमी के फोन सबसे ज्यादा भारत, साउथ-ईस्ट एशिया और यूरोप में बेचे जाते हैं, जहां कंपनी के पास अच्छा मार्केट शेयर है. मिड-रेंज और बजट सेगमेंट में रियलमी कई कंपीटिटिव फीचर्स पेश करती है. अब इस इंटीग्रेशन के बाद रियलमी की आफ्टर सर्विस का पूरा काम ओप्पो देखेगी. वहीं रियलमी के फाउंडर और सीईओ स्काई ली को इस इंटीग्रेशन का पूरा काम देखने के लिए नियुक्त किया गया है. आगे चलकर रियलमी और वनप्लस दोनों खुद को ओप्पो के साथ अलाइन करेंगे और अलग-अलग मार्केट स्ट्रैटजी बनाएंगे. हालांकि, अभी तक इस डील की फाइनेंशियल टर्म्स का खुलासा नहीं हुआ है यानी यह पता नहीं चल पाया है कि यह सौदे कितने पैसों में हुआ है.

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