RailOne App Features: भारतीय रेल में सफर करने वाले यात्रियों को अब टिकट लेने के लिए टिकट काउंटर पर लंबी कतार में लगने की जरुरत नहीं पड़ती. क्योंकि आज के समय ऐसे कई सारे एप मौजूद हैं, जिनकी मदद से आप घर बैठे ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं. बाजार में ट्रेन टिकट बुक करने वाले कई प्राइवेट और सरकारी ऐप्स मौजूद हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से रेलवे का एक नया ऐप RailOne तेजी से चर्चा में है. अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि आखिर टिकट बुकिंग के कौन से एप अच्छे हैं और यह नया RailOne ऐप बाकी ऐप्स से कितना अलग और बेहतर है?

Continues below advertisement

किन ऐप्स से बुक होता है ट्रेन टिकट

भारत में मुख्य रूप से दो तरह के ऐप्स से ट्रेन टिकट बुक होता है, एक सरकारी और दूसरे प्राइवेट थर्ड-पार्टी ऐप्स. 

IRCTC Rail Connect- यह भारतीय रेलवे का सबसे पुराना और आधिकारिक ऐप है. सालों से करोड़ों लोग इसी ऐप के जरिए रिजर्वेशन और तत्काल टिकट बुक करते आ रहे हैं. प्राइवेट ऐप्स (ConfirmTkt, Ixigo, MakeMyTrip)- ये प्राइवेट कंपनियां हैं जो रेलवे से जुड़ी हुई हैं. इन ऐप्स का इस्तेमाल लोग बेहतरीन यूजर इंटरफेस, आसान सीट प्रेडिक्शन और कैशबैक ऑफर्स के लिए करते हैं.

Continues below advertisement

Railone क्यों है अलग?

अब तक रेल यात्रियों को अपने फोन में अलग-अलग एप डाउनलोड करने पड़ते थे. जैसे रिजर्वेशन और तत्काल टिकट के लिए IRCTC, लोकल या जनरल टिकट और प्लेटफॉर्म पास के लिए UTS ऐप और शिकायत दर्ज कराने के लिए Rail Madad जैसे ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता था. लेकिन अब ये सारे काम इस एक ही एप पर कर सकते हैं. साथ ही इसमें पुराने IRCTC या UTS अकाउंट के क्रेडेंशियल्स से ही डायरेक्ट लॉगिन किया जा सकता है. इसके अलावा अगर आप इस एप से के जरिए जनरल टिकट बुक करते है तो आपको कई तरह की छूट भी मिलती है. 

यह भी पढ़ें: Super OLED में ही क्यों आता है इन डिस्प्ले फिंगर प्रिंट, बाकी में क्यों नहीं?

डेली यात्रा करने वाले नौकरीपेशा और छात्रों के लिए RailOne ऐप के जरिए अपना मासिक सीजन टिकट यानी मंथली पास बनवाना बेहद आसान हो गया है. इसके अलावा आम ऐप्स में ट्रेन की लाइव लोकेशन बहुत बेसिक दिखती है. लेकिन RailOne App में सटीक रियल-टाइम लोकेशन के साथ-साथ यह भी पता चल जाता है कि आपका डिब्बा इंजन से कितनी दूर और किस नंबर पर आएगा. ट्रेन टिकट बुक करने के अलावा इसी ऐप के भीतर चलती ट्रेन में खाना ऑर्डर करने और किसी भी असुविधा की शिकायत दर्ज करने के लिए रेल मदद का इन-बिल्ट सपोर्ट दिया गया है. 

यह भी पढ़ें: 15 अगस्त 1947 के बाद टेक्नोलॉजी में कितना बदल गया भारत? जानें पूरा सफर