अभी स्मार्टफोन में कोई भी काम करने के लिए ऐप्स की जरूरत पड़ती है. वीडियो देखना है तो यूट्यूब पर जाना पड़ेगा, वहीं ऑनलाइन ट्रांजेक्शंस करने के लिए पेमेंट ऐप्स पर जाना पड़ता है, लेकिन जल्द ही इन ऐप्स की जरूरत खत्म हो सकती है. अमेजन में डिवाइसेस और सर्विसेस के हेड पेनोस पनय का कहना है कि यूजर जल्द ही स्क्रीन-सेंट्रिक एक्सपीरियंस से दूर हो जाएंगे. यानी उन्हें किसी सर्विस के लिए ऐप्स की जरूरत नहीं रहेगी.

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धीरे-धीरे आ रहा है बदलाव- पनय

पनय ने कहा कि स्मार्टफोन और ऐप्स टिप्पिंग प्वाइंट पर पहुंच रहे हैं. लोग सोशल मीडिया से थक चुके हैं और जनरेटिव एआई लगातार बढ़ रही है. यंग यूजर्स में पहले से ही ऐप्स से दूर होने के संकेत दिख रहे हैं और इस बदलती आदत से टेक्नोलॉजी के साथ लोगों का इंटरेक्शन पूरी तरह बदल जाएगा. उनका कहना है कि एआई की असली कामयाबी बेहतर ऐप्स बनाना नहीं है बल्कि ऐप्स की जरूरत को ही खत्म कर देना है.

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ऐप्स की जगह ले लेगी एम्बिएंट इंटेलीजेंस- पनय

पनय ने कहा कि आने वाला समय एम्बिएंट इंटेलीजेंस का होगा, जहां पर टेक्नोलॉजी को लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी और यह बैकग्राउंड में चलती रहेगी. इस मॉडल में टेक्नोलॉजी स्क्रीन पर नहीं रहेगी बल्कि यह डिवाइसेस, होम्स और वीयरेबल्स में आ जाएगी. जब जरूरत होगी तो यह रिस्पॉन्स देगी और काम खत्म होने के बाद गायब हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी ऐप की जरूरत नहीं पड़ेगी और यह नैचुरल इंटरेक्शन पर काम करेगी. यानी जरूरत होने पर यूजर बोलकर कोई सवाल पूछेगा और यह बिना किसी मेनू या ऐप के उसका जवाब दे देगी. पनय ने कहा कि अलेक्सा को भी इसी तरह के एम्बिएंट फ्यूचर में फिट होने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां पर किसी एक डिवाइस या स्क्रीन से बंधे होने की बजाय अलग-अलग जगहों पर यूजर की जरूरतों के हिसाब से काम करेगा.

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